वाराणसी। रेशम पर 5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी बढ़ने से रेशम से तैयार होने वाली साड़ियों के दाम में भी वृद्धि होगी। कोरोना से बेजार साड़ी के बाजार को यह दूसरा झटका माना जा रहा है। बनारसी साड़ी की धाक पूरी दुनिया में है। देश-विदेश में हर माह बनारसी साड़ियों का निर्यात होता है, एक बड़ा बाजार अपने पूर्वांचल में बनारसी साड़ियों का है, लेकिन अब साड़ी उद्योग से जुड़े कारोबारियों को यह चिंता सता रही है कि बनारसी साड़ी अब और महंगी हो जाएगी। वित्त मंत्री द्वारा पेश बजट में रेशम पर कस्टम ड्यूटी 5 प्रतिशत बढ़ा देने से बनारसी साड़ियों महंगी होंगी, चूंकि पहले कस्टम ड्यूटी सिल्क पर 10 प्रतिशत थी। ऐसे में बनारसी साड़ी पर अब कुल 15 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी लगेगी।
साड़ी उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार कॉटन पर 10 प्रतिशत और सिल्क पर 5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी से बनारस का उद्योग महंगा तो वहीं सूरत का उद्योग सस्ता हो जाएगा। चूंकि नायलान और पालिस्टर पर कस्टम ड्यूटी घटाई गई है। सूरत में नायलान से बनने वाली साड़ियों सस्ती होने से ग्राहकों का रुझान सस्ती साड़ियों पर ही होगा। बनारस में चीन, वियतनाम और बंगलूरू से रेशम आता है। साड़ी उद्यमियों के अनुसार चीन से चार हजार टन सालान रेशम का आयात होता है। इस समय रेशम 4200 रुपये किलो है और 5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी बढ़ने से 300 से 400 रुपये प्रति किलो रेशम के दाम में बढ़ोतरी होगी। इसका असर बनारसी साडिय़ों के उत्पादन पर पड़ेगा। बनारस में 500 से लेकर 2 लाख कीमत तक की बनारसी साड़ियों की बिक्री होती है।
बनारसी साड़ी उद्योग में जिले भर के लगभग 5 लाख लोग जुड़े हुए हैं। जबकि बनारस से आसपास जिलों में मऊ, आजमगढ़, चंदौली, भदोही और मिर्जापुर को ले लिया जाए यह संख्या लगभग 15 लाख हो जाएगी। शहर में 70 हजार हथकरघा हैं तो लगभग ढाई लाख पावरलूम की संख्या है। हथकरघा पर काम करने वाले कम और पावरलूम पर नई पीढ़ी ज्यादा जोर दे रही है।
ौगढ़, सोनभद्र में रेशम की खेती की अपार संभावनाएं हैं, सरकार को उसे बढ़ावा देना चाहिए। हमे चीन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बंगलूरू का भी रेशम काफी अच्छा माना जाता है, सरकार उसे ही बढ़ावा दे तो रोजगार का सृजन भी होगा।-डॉ. रजनीकांत, पद्मश्री व जीआई विशेषज्ञ
नायलान पर कस्टम ड्यूटी घटेगी तो इससे बनारसी साड़ी का उद्योग काफी प्रभावित होगा। बनारसी साड़ी महंगी होगी तो वहीं सूरत का उद्योग पनपेगा। नायलान की साड़ियों का उत्पादन सूरत में अधिक होता है। ग्राहकों का रुझान फिर सस्ते सामानों पर होगा।-राजन बहल, महामंत्री, बनारसी वस्त्र उद्योग एसोसिएशन
नोटबंदी, जीएसटी व कोरोना की मार झेल रहे बनारसी साड़ी उद्योग को 5 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी बढ़ने से तगड़ा झटका लगा है। इससे रेशम से बनी बनारसी साड़ियों
के मूल्यों में वृद्धि हो जाएगी। यह उद्यमियों व ग्राहकों दोनों के लिए ठीक नहीं है।-महेश नवलगढ़िया, अध्यक्ष, रेशमी तागा संघ
एक नजर
-200 करोड़ प्रति माह है बनारसी साड़ी का करोबार
-1500 टन सिल्क हर माह चीन से होता है आयात
-4200 रुपये प्रति किलो है रेशम
-5 लाख लोग जिले भर में जुड़े बनारसी साड़ी उद्योग से
-60 से 70 हजार जिले में है हथकरघा
-2 लाख 50 हजार संचालित होते हैं पावरलूम
-500 से 2 लाख तक की बनती है साड़ियां