बनारस के आसपास ग्रामीण पर्यटन की आपार संभावनाएं हैं। पर्यटन उद्योग से जुड़े उद्यमी, कारोबारी अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्र को चुन कर बताएं, इसकी पूरी कार्ययोजना बनाकर उन ग्रामीण इलाकों में पर्यटन विकास पर कार्य किया जाएगा। पंचक्रोशी यात्रा अपने आप में ग्रामीण पर्यटन का उदाहरण है, जो वर्षों से चला आ रहा है। उक्त बातें सूबे के पर्यटन मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने रविवार को टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से आयोजित पर्यटन व ग्रामीण विकास विषयक वेबिनार को मुख्य अतिथि पद से संबोधित करते हुए कही। यूनडब्लूटीओ निर्धारित थीम पर उन्होंने कहा कि पंचक्रोशी यात्रा में ऐसे कई पड़ाव है, जहां पर्यटकों को ग्रामीण परिवारों के बीच रहने का भी अनुभव करा सकते हैं। यहां के कई गांव का ऐतिहासिक महत्व भी है। काशी के चारों तरफ अलग-अलग विषय पर ग्रामीण पर्यटन का प्रचार कर पर्यटकों को कई दिन-रात का पैकेज दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि बनारस के आस-पास गांवों की हस्तकलाएं भी प्रसिद्ध हैं। जिसको हस्तकला व हैंडीक्राफ्ट को ध्यान में रख कर टूर पैकेज विकसित करें।
इस अवसर पर अपने संबोधन में बीएचयू, कला और पर्यटन प्रबंधन विभाग के निदेशक प्रो. प्रदोष कुमार मिश्रा ने कहा कि आने वाला समय ग्रामीण पर्यटन का है। कोरोना काल के बाद आने वाला पर्यटक शहर से ज्यादा ग्रामीण इलाकों में भ्रमण करना चाहेगा। वसंता कॉलेज फॉर वुमेन के यात्रा और पर्यटन प्रबंधन के एसोसिएट प्रोफेसर प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि ग्रामीण पर्यटन के साथ वेल्लनेस टूरिज्म जैसे योग और आयुर्वेद को जोड़ कर टूर बने जिससे पर्यटक अधिक से अधिक समय बनारस में रह सके। टीडब्ल्यूए के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्र का प्रचार आनलाइन आभासी यात्रा के जरिए करने की मुहिम चलाई जाएगी। इस दौरान दूसरे सत्र में सुनील शर्मा द्वारा चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य की ऑनलाइन आभासी यात्रा भी कराई गई। जिसका अवलोकन पर्यटन मंत्री संग सभी उद्यमियों ने किया।
वेबिनार में अमित गुप्ता निदेशक इंडिया टूरिज्म, आईआईए के टूरिज्म कमेटी के चेयरमैन अरविंद कुमार, होटल एसोसिएशन के महामंत्री गोकुल शर्मा, प्रदीप राय, शैलेंद्र सिंह व अभिषेक सिंह, संतोष सिंह, विवेक तिवारी, अभिषेक पाठक, राजीव पांडेय, जितेंद्र सिंह, अमित शुक्ला, पंकज सिंह, सौरभ शुक्ला, सुभाष कपूर, दिलीप पांडेय, राजेश विश्वकर्मा मौजूद रहे।