गंगा में नावों की संख्या पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम ने नई योजना बनाई है। अब नावों के लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए नाविकों को जल पुलिस से फीडबैक लेना होगा। इसमें नाविकों के अनुभव और तौर-तरीकों के आधार पर जल पुलिस प्रस्ताव पर मुहर लगाएगी।
नगर निगम के इस फैसले से नाविक समाज में असंतोष है। मां गंगा निषादराज सेवा न्यास के अध्यक्ष प्रमोद मांझी ने नगर निगम प्रशासन से नाव लाइसेंस देने के लिए ऑनलाइन और पारदर्शी एकल काउंटर व्यवस्था लागू कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि लाइसेंस के नाम पर नाविकों का उत्पीड़न नहीं होने देंगे। गंगा में पर्यटकों के सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी नाविकों पर ही होती है। इसके बाद जल अथवा एनडीआरएफ के सुरक्षाकर्मी आते हैं।
अजीत साहनी ने कहा कि नगर निगम नए लाइसेंस देने में विफल है। नए लाइसेंस देने के बजाय नगर निगम नाविकों की मांग को दूसरे विभाग पर टाल रहा है। यह सब नाविकों को परेशान करने के लिए किया जा रहा है। जल्द ही इसपर नाविक समाज की बैठक बुलाई जाएगी। तन्ना साहनी ने बताया कि 250 लाइसेंस के आवेदन पेंडिंग हैं। नगर निगम पहले यह तय करे की लाइसेंस कौन देगा इसके बाद बाद ही नाविक नाव लाइसेंस का नवीनीकरण कराएंगे।