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Varanasi News: गांवों की सफाई में चमकी काशी, देश में नंबर-1; स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण में UP ने भी मारी बाजी

Fri, 22 May 2026 09:27 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Swachh Survekshan Gramin 2025: स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण में वाराणसी ने देशभर में पहला स्थान हासिल कर स्वच्छता के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। गांवों में बेहतर सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और जनभागीदारी के दम पर काशी ने यह उपलब्धि पाई। वहीं, उत्तर प्रदेश ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर बाजी मारी है।
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नगर निगम वाराणसी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Varanasi News: केंद्र सरकार की ओर से बृहस्पतिवार को जारी की गई रैंकिंग में स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 में वाराणसी को सेंट्रल जोन का सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया है। वहीं, उत्तर प्रदेश राज्यों की श्रेणी में पहले स्थान पर रहा। ग्रामीण इलाकों में शौचालय उपयोग, कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्थलों की सफाई, हाथ धोने की आदत और नागरिकों की संतुष्टि जैसे पैमानों पर वाराणसी का प्रदर्शन सबसे बेहतर पाया गया।

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केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से जारी स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2025 की रिपोर्ट में वाराणसी को सेंट्रल जोन का नंबर-1 जिला घोषित किया गया है। सीडीओ प्रखर कुमार सिंह ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत यह सर्वेक्षण देश के गांवों में स्वच्छता की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कराया गया था।
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सर्वेक्षण में गांवों में शौचालयों की उपलब्धता, उनके नियमित उपयोग, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई, सामुदायिक शौचालयों की स्थिति और लोगों की संतुष्टि को आधार बनाया गया। 

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सफाईकर्मियों की वाहवाही

रिपोर्ट के अनुसार देश के 744 जिलों और 20,659 गांवों का सर्वे किया गया। इसके तहत 3,22,033 ग्रामीण परिवारों और 1,03,607 सार्वजनिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों, स्कूलों, पंचायत भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सामुदायिक शौचालय परिसरों का निरीक्षण किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक 93 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों के पास शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। 

इनमें से 95 प्रतिशत परिवार नियमित रूप से शौचालय का उपयोग करते मिले। 98 प्रतिशत परिवार सुरक्षित तरीके से हाथ धोते पाए गए। इनमें 88 प्रतिशत परिवार साबुन और पानी दोनों का इस्तेमाल करते मिले। 58 प्रतिशत परिवार जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग करते पाए गए। 

47 प्रतिशत परिवार गैर-जैविक कचरे को कबाड़ी वालों को बेचते हैं। 39 प्रतिशत गांवों में कम्युनिटी सैनिटरी कॉम्प्लेक्स मिले, जिनमें 98 प्रतिशत चालू हालत में थे। इनमें से 70 प्रतिशत परिसरों के शौचालय साफ और उपयोग योग्य पाए गए।
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