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वाराणसी समेत पूर्वांचल में दिल्ली जैसे हालात

Tue, 08 Nov 2016 01:53 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रदूषण्‍ा
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काशी के लोग सोमवार सुबह जब घर से निकले तो प्रदूषण की खबरों में पढ़ रहे दिल्ली के हालात में खुद को भी पाया। यही हाल पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों में दिखा। बदली की तरह छाई धुंध, धुएं से परेशानी महसूस होने लगी, धीरे-धीरे आंखों में जलन और सांस में समस्या होने लगी, लोग डॉक्टर के यहां भी पहुंचे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े भी तेजी से चढ़ने लगे, शाम तक हालात और भी बदतर हो गए।
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सुबह सात से नौ बजे तक (पीएम 2.5) 297  था लेकिन दोपहर बाद यह आंकड़ा तेजी से बदला और प्रदूषण का स्तर (पीएम 2.5) 432, (पीएम 10) 409  तक और देर शाम 8.30 बजे तक यह क्रमश: 446 और 419 पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुआल और कूड़ा जलाने से लेकर पटाखों तक का ग्लोबल असर है। पेट्रोल-डीजल के वाहनों, फैक्ट्री का प्रदूषण, ईंट भट्ठे और स्टोन क्रशर का प्रदूषण भी कारक माना जा रहा है। सोमवार को प्रदूषण में वाराणसी देश में छठे नंबर पर रहा। यहां से अधिक फरीदाबाद , दिल्ली, आगरा, लखनऊ, गुड़गांव में  दर्ज किया गया। (पीएम 10) भी 100 के स्तर पर सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है।

जलता कूड़ा शहर की आबोहवा में घोल रहा जहर
शहर में प्रदूषण खतरनाक स्थिति में पहुंच चुका है। प्रदूषण को बढ़ावा देने में नगर निगम भी कम जिम्मेदार नहीं है। शहर के  कई इलाकों में कूड़ा नियमित जला दिया जा रहा है। इससे प्लास्टिक के अलावा अन्य कूड़ा कचरे से निकला धुआं शहर की आबोहवा में जहर घोल रहा है। जलते कूड़े-कचरे से निकलने वाले धुएं से लोगों में बीमारियां बढ़नी लगी है। पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान बीएचयू की डायरेक्टर प्रो कविता साह का कहना है कि फसलों को काटने के बाद उसके अवशेष और कूड़े-कचरे को जलाने से आसमान में धुंध बन जाता है। इसका मानव जीवन पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। पटाखे फोड़ने के बाद उससे निकलने वाले धुएं भी खतरनाक होते हैं।
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