नित्यानंद राय ने इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व भी बताया। उनके अनुसार, शिवाला क्षेत्र 1781 में हुए अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने दावा किया कि उस समय वारेन हेस्टिंग्स को बुर्का पहनकर भागना पड़ा था और कई अंग्रेजों की मौत हुई थी, जिनके शव इसी परिसर में दफन हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थान ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी है और इसकी विरासत को संरक्षित किया जाना चाहिए।
वहीं, आईएमए के अध्यक्ष डॉ. अनुराग टंडन ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि आईएमए भवन का नक्शा वीडीए ने सभी नियमानुसार स्वीकृत किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग भवन को पुरातात्विक स्थल बताकर विवाद खड़ा कर रहे हैं, वे विकास विरोधी हैं और राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक है।