वाराणसी की पहचान से जुड़ी वरुणा नदी का भी अस्तित्व खतरे में है। पहले से ही पर्याप्त जलराशि के अभाव से जूझ रही वरुणा नदी भू-माफिया, नगर निगम और वीडीए की मिलीभगत के कारण भी असि नदी की राह पर चल पड़ी है। उच्चाधिकारियों की लापरवाही से वरुणा के डूब क्षेत्र में सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए हैं। इन अवैध निर्माणों ने न सिर्फ वरुणा के प्रवाह को बाधित किया है बल्कि शहर को भीषण बाढ़ के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। वरुणा किनारे अवैध निर्माण कराने वाले 762 भवन स्वामियों को वीडीए और 30 लोगों को सिंचाई विभाग ने डेढ़ साल पहले नोटिस दिया था। तब से कार्रवाई के नाम पर अब तक केवल रमाडा होटल का एक हिस्सा ही ढहाया गया है। इसके साथ ही अवैध निर्माण करने वालों की मदद के लिए जनप्रतिनिधि भी आगे आ गए हैं।
वरुणा नदी सूखने के कगार पर है। वरुणा नदी में पीछे से पानी नहीं आने से सैकड़ों गांवों के फसलों की सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। शहर क्षेत्र में वरुणा में दिखने वाला पानी मलजल है। नदी में पानी की कमी के लिए इसके प्राकृतिक स्वरूप से की गई छेड़छाड़ और मनमाने निर्माण जिम्मेदार है। भू-माफिया, नगर निगम, वीडीए और प्रशासनिक अधिकारियों के गठजोड़ से नदी के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों की भरमार हो गई है। रही-सही कसर वरुणा कॉरिडोर की योजना पर काम शुरू कर अंजाम दी जा रही है।
राजस्व और सिंचाई विभाग के रिकार्ड में वरुणा किनारे से 40 से 80 मीटर तक का दायरा डूब क्षेत्र है। इसी बीच वरुणा कॉरिडोर की योजना लागू करने से पूर्व ड्रोन सर्वे के खुलासे के बाद भी अवैध निर्माण जस के तस हैं। वीडीए ने नदी के दोनों किनारों पर 50 मीटर के दायरे को ग्रीन बेल्ट घोषित कर यहां निर्माण करने पर पाबंदी लगा दी है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि डूब क्षेत्र में अतिक्रमण नगर निगम बनने के बाद हुआ।
निगम बनने के बाद नदी किनारे की जमीन का मालिक सिंचाई विभाग के बजाय निगम हो गया। फिर जिला प्रशासन की अनदेखी से डूब क्षेत्र में जमीनों की रजिस्ट्री हो गई। नगर निगम ने दाखिल खारिज कर मकान नंबर एलाट कर दिया। बाद में वीडीए बनने पर भी अवैध निर्माणों पर ध्यान नहीं दिया गया। डूब क्षेत्र में अब तक सैकड़ों भवन, होटल और व्यावसायिक कांप्लेक्स अवैध ढंग से खड़े हो गए हैं।
जानकारों के मुताबिक वरुणा में पहले दिसंबर में पर्याप्त पानी रहता था। इसके बाद पानी कम होने पर ज्ञानपुर शीर्ष प्रखंड से पानी छोड़ा जाता था। इस बार पानी नहीं छोड़े जाने से नदी सूखने की कगार पर है। कहीं-कहीं तो केवल कीचड़ भर है।
सत्तनपुर, हिरमपुर, पांडेयपुर, जगपट्टी, परसीपुर, तेंदुई, रसूलपुर, चक्का, अवसानपुर, बलुआ, नेवादा, घुसपुर, सालिवाहनपुर, खेवली, कूड़ी, इसवार, खंडा, रामेश्वर सहित कई गांवों में फसलों की सिंचाई इसी नदी के सहारे होती थी। इस बार पानी कम होने से फसलों और सब्जियाें की खेती के लिए पानी नहीं मिल रहा है।