अध्यक्षता करते हुए बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने आयोजकों को सांस्कृतिक स्मृतियों को सहेजने की पहल के लिए बधाई दी। कहा कि राही मासूम रजा जैसे साहित्यकारों और महापुरुषों के योगदान को निरंतर याद करते रहना जरूरी है।
इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक केजी सुरेश ने कहा कि राही मासूम रजा ने भारतीय संस्कृति और विरासत को आत्मसात किया था। महाभारत धारावाहिक के माध्यम से उन्होंने भारतीय विरासत और संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाई। उनका उपन्यास ‘आधा गांव’ साझी विरासत के खोने की पीड़ा और सामाजिक यथार्थ का सशक्त चित्रण है।
भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन एनपी सिंह ने कहा कि सृजनधर्मियों की मृत्यु नहीं होती, उनकी रचनाएं उन्हें अमर बनाती हैं। राही ने अपनी रचनाओं के माध्यम से आगाह किया कि विभाजन की मानसिकता समाज और देश को अलग-अलग खेमों में बांटती है।