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सूरत ए हालः बनारस में भी हो सकता है गोरखपुर जैसा हादसा, सरकारी अस्पतालों का हाल चौंकाने वाली

Sun, 13 Aug 2017 04:50 PM IST
amarujala.com, written by-रबीश श्रीवास्तव
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सुविधाओं की बदहाली पर विभागीय अधिकारियों की नजर नहीं, चल रहा जैसे-तैसे - फोटो : अमर उजाला
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वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक प्रणाली से जुड़ी सुविधाओं तक की नियमित मॉनीटरिंग नहीं होती। शनिवार को जब मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल और महिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडरों का हाल जाना गया तो चौंकाने वाली स्थिति दिखी।
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किसी ऑक्सीजन सिलेंडर में लगे चेक मीटर की सूई खराब थी तो किसी का चेक मीटर ही गायब था। मंडलीय अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में मात्र दो ही ऑक्सीजन सिलेंडर हैं, बावजूद इसके एक के चेक मीटर की सूई टूटी दिखी। इसे यहां भर्ती डेढ़ साल की लाडो को लगाया गया था।

दूसरे की नियमित मानीटरिंग की सेफ्टी लिस्ट पर 27 मई 2017 की तारीख दर्ज थी। इमरजेंसी में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर का पूरा नॉब ही टूटा पड़ा था। जबकि निर्देश है कि हर दिन ऑक्सीजन सिलेंडर चेक किए जाएं और चेक करने वाले का हस्ताक्षर भी हो। 
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मंडलीय, महिला अस्पताल और दीनदयाल अस्पताल के कई वार्डों में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम भी है लेकिन इसकी भी नियमित मॉनीटरिंग नहीं होती। मंडलीय अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड जहां सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की सबसे अधिक जरूरत है, वहां यह सुविधा नहीं है।

ऑक्सीजन सिलेंडरों का ही सहारा होता है। जबकि नीचे के तल से यहां तक ऑक्सीजन सिलेंडर लाने में तकरीबन आधे घंटे लग जाते हैं। प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव कहते हैं कि जिस सिलेंडर की दशा ठीक नहीं है, उसे तत्काल सही करवाया जा रहा है।

अस्पताल में 45 बड़े और 70 छोटे सिलेंडर हैं और सभी चालू हालत में हैं। 316 बेड के अस्पताल में 145 बेड तक सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम लगा है। महिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम के बावजूद अक्सर ऑक्सीजन सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है, वजह- सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम का रखरखाव न होना।

कभी-कभी तो यहां मंडलीय अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाना पड़ता है। हालांकि प्रमुख अधीक्षिका डॉ. शैला त्रिपाठी सब कुछ ठीक होने का दावा करती हैं। दीनदयाल अस्पताल में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की आपूर्ति मेडिकल, सर्जिकल, इमरजेंसी वार्ड और ट्रामा सेंटर के साथ ही ऑपरेशन थियेटर में है।

आपरेशन थियेटर, ट्रामा और इमरजेंसी को छोड़कर अन्य जगहों पर पाइप लाइन पूरी तरह ध्वस्त है। जरूरत पड़ने पर सिलेंडर का ही सहारा होता है। जबकि, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके उपाध्याय दावा करते हैं कि ऑक्सीजन सिस्टम पूरी तरह फिट है।

नियमित तौर पर इसकी मॉनीटरिंग कराई जाती है। हाल ही में शासन से आई टीम ने भी यह व्यवस्था देखी थी। 

अस्पतालों पर 70 लाख का बकाया

मरीजों के नाश्ता-भोजन, जेनरेटर के डीजल और दवाओं के बकाए की फाइल महीनों से लटकी - फोटो : अमर उजाला
सरकारी अस्पतालों मेें भुगतान लटकाए रखने का खेल कोई नया नहीं। मरीजों से जुड़ी सेवाओं के भुगतान भी समय पर नहीं होते। गोरखपुर में बकाए का भुगतान न होने पर ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से 30 नौनिहालों की मौत के बाद जब यहां लंबित भुगतानों की पड़ताल की गई तो कुछ वैसी ही कहानी सामने आई।

हालांकि यहां बकाए के मद अलग हैं लेकिन लंबी दौड़भाग के बाद भी भुगतान न होने की मशक्कत कमोबेश एकजैसी ही है। मरीजों के नाश्ता-भोजन, एंबुलेंस, जेनरेटर के डीजल और दवाओं के करीब 70 लाख रुपये बकाए की फाइल महीनों से लटकी है। सबसे अधिक भोजन मद में 40 लाख बकाया है। 

 102 और 108 एंबुलेंस जैसी सेवाओं के लिए समुचित बजट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। बिजली कटने पर अस्पतालों में जेनरेटर चलाने के लिए मंगाए गए डीजल का तकरीबन 15 लाख बकाया है।

मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, जिला महिला अस्पताल, दीनदयाल, रामनगर अस्पताल में हर दिन दो हजार से अधिक मरीज ओपीडी में आते हैं जबकि भर्ती मरीजों की संख्या औसतन 500 होती है।

भर्ती मरीजों को हर दिन दो समय भोजन और नाश्ता देने की व्यवस्था शासन ने दी है लेकिन यहां जिम्मेदारी संभालने वाली फर्म का अप्रैल से जुलाई माह तक का करीब 40 लाख रुपये बकाया है।

सरकारी व्यवस्था के तहत निर्धारित कंपनियां तय रेट पर दवाएं आपूर्ति करती हैं और उसका भुगतान अस्पतालों की ओर से किया जाता है। इस मद का भी 15 लाख रुपये बाकी है।
महीनों से लंबित भुगतान पर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शासन से पत्राचार किया गया है, जब बजट आएगा तब भुगतान कर दिया जाएगा।  

किस मद में कितना बकाया
नाश्ता-भोजन       40 लाख 
डीजल                  15 लाख 
दवा खरीद             15 लाख
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गोरखपुर की घटना के बाद शासन सख्त

ऑक्सीजन सिलेंडर - फोटो : अमर उजाला
 गोरखपुर की घटना के बाद शासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव ने सभी सीएमओ और सीएमएस को पत्र भेजकर जीवन रक्षक सभी उपकरणों और दवाओं को इमरजेंसी सेवा के तहत तत्काल व्यवस्थित करने की ताकीद की है।

कहा है कि अस्पतालों में ये सभी सुविधाएं चौबीसों घंटे एलर्ट पर रखी जाएं। शासन ने पर्याप्त बजट की व्यवस्था की है। नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित कराई जाए। 

इस बीच, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा शनिवार की शाम करीब छह बजे मंडलीय और महिला अस्पताल कबीरचौरा पहुंचे। यहां उन्होंने इमरजेंसी सहित अन्य वार्डों में लगे ऑक्सीजन सिस्टम और सिलेंडर की आपूर्ति के बारे में जानकारी ली। हिदायत दी कि जीवन रक्षक उपकरणों के रखरखाव में जरा भी लापरवाही बरदाश्त नहीं की जाएगी। नियमित मॉनीटरिंग सुनिश्चित कराई जाए। 

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