वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में जीवन रक्षक प्रणाली से जुड़ी सुविधाओं तक की नियमित मॉनीटरिंग नहीं होती। शनिवार को जब मंडलीय अस्पताल, दीनदयाल अस्पताल और महिला अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडरों का हाल जाना गया तो चौंकाने वाली स्थिति दिखी।
किसी ऑक्सीजन सिलेंडर में लगे चेक मीटर की सूई खराब थी तो किसी का चेक मीटर ही गायब था। मंडलीय अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में मात्र दो ही ऑक्सीजन सिलेंडर हैं, बावजूद इसके एक के चेक मीटर की सूई टूटी दिखी। इसे यहां भर्ती डेढ़ साल की लाडो को लगाया गया था।
दूसरे की नियमित मानीटरिंग की सेफ्टी लिस्ट पर 27 मई 2017 की तारीख दर्ज थी। इमरजेंसी में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर का पूरा नॉब ही टूटा पड़ा था। जबकि निर्देश है कि हर दिन ऑक्सीजन सिलेंडर चेक किए जाएं और चेक करने वाले का हस्ताक्षर भी हो।
मंडलीय, महिला अस्पताल और दीनदयाल अस्पताल के कई वार्डों में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम भी है लेकिन इसकी भी नियमित मॉनीटरिंग नहीं होती। मंडलीय अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड जहां सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की सबसे अधिक जरूरत है, वहां यह सुविधा नहीं है।
ऑक्सीजन सिलेंडरों का ही सहारा होता है। जबकि नीचे के तल से यहां तक ऑक्सीजन सिलेंडर लाने में तकरीबन आधे घंटे लग जाते हैं। प्रमुख अधीक्षक डॉ. बीएन श्रीवास्तव कहते हैं कि जिस सिलेंडर की दशा ठीक नहीं है, उसे तत्काल सही करवाया जा रहा है।
अस्पताल में 45 बड़े और 70 छोटे सिलेंडर हैं और सभी चालू हालत में हैं। 316 बेड के अस्पताल में 145 बेड तक सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम लगा है। महिला अस्पताल में सेंट्रल आक्सीजन सिस्टम के बावजूद अक्सर ऑक्सीजन सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है, वजह- सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम का रखरखाव न होना।
कभी-कभी तो यहां मंडलीय अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाना पड़ता है। हालांकि प्रमुख अधीक्षिका डॉ. शैला त्रिपाठी सब कुछ ठीक होने का दावा करती हैं। दीनदयाल अस्पताल में सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम की आपूर्ति मेडिकल, सर्जिकल, इमरजेंसी वार्ड और ट्रामा सेंटर के साथ ही ऑपरेशन थियेटर में है।
आपरेशन थियेटर, ट्रामा और इमरजेंसी को छोड़कर अन्य जगहों पर पाइप लाइन पूरी तरह ध्वस्त है। जरूरत पड़ने पर सिलेंडर का ही सहारा होता है। जबकि, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके उपाध्याय दावा करते हैं कि ऑक्सीजन सिस्टम पूरी तरह फिट है।
नियमित तौर पर इसकी मॉनीटरिंग कराई जाती है। हाल ही में शासन से आई टीम ने भी यह व्यवस्था देखी थी।