अस्सी घाट पर आईकीडो का प्रशिक्षण लेतीं बेटियां
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काशी की बेटियां दूसरे की ताकत से खुद को मजबूत करने में जुटी हुई हैं। फिटनेस के साथ ही आत्मरक्षा की यह तकनीक युवतियों को काफी भा रही है। कराटे से एकदम अलग यह विधा आंतरिक शक्ति का इस्तेमाल कर सामने वाले को पटखनी देने में कारगर है।
कमांडो एकेडमी आफ मार्शल आर्ट्स की ओर से आईकीडो के प्रशिक्षण के लिए युवतियों को तैयार किया जा रहा है। मार्शल आर्ट्स की विधा आईकीडो में सामने वाले की ताकत का इस्तेमाल उसके खिलाफ ही किया जा सकता है। फाइटिंग के साथ योगा का समन्वय आपको बेहद मजबूत बनाता है।
संस्था के अखिलेश रावत ने बताया कि आजकल छेड़खानी की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है और ऐसे में बेटियों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है। फिटनेस के साथ ही आत्मरक्षा भी लड़कियों को सिखाई जा रही है। युवतियां और महिलाओं का आकर्षण इस विधा की तरफ तेजी से बढ़ा है।
विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में भी आईकीडो का प्रशिक्षण देकर युवतियों को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लड़कियां घर से बाहर अकेले निकलने से डरती हैं। इसलिए हर मां बाप अपनी बच्चियों को पूरी तरह से प्रशिक्षित करना चाहते हैं।
यह विधा कराटे से बिल्कुल भिन्न है क्योंकि इसमें अपनी ताकत का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती है। सामने वाले की ताकत इस्तेमाल कर वह उसे पटखनी देने का काम करती हैं। इसलिए लड़कियां कराटे और जूडो को छोड़कर अब इस विधा की ट्रेनिंग ले रही हैं। उन्होंने बताया कि लड़कियों को आईकीडो की ट्रेनिंग देकर 2020 तक शक्ति सेना तैयार करने की योजना है।
इस शक्ति सेना का उद्देश्य लड़कियों को मजबूत और सशक्त बनाना है ताकि वह किसी भी परिस्थिति का डटकर सामना कर सकें। इसके लिए संस्था ने काशी की 9 नारी शक्तियों को नवरत्न के रूप में सहयोगी बनाया। आई (सामंजस्य) की (जीव ऊर्जा ), डो ( रास्ता ) आईकीडो तीन जापानी शब्दों का संगम है। जिसका मतलब है जीव उर्जा का सामंजस्य रखने का रास्ता।