लंबे इंतजार के बाद बनारस को दो बहुप्रतीक्षित पुलों की सौगात मिल गई। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गंगा पर बने सामनेघाट-रामनगर और बलुआघाट पुल (चंदौली) का बड़ालालपुर स्थित खेल मैदान से एक साथ लोकार्पण किया।
इसी के साथ एक दशक से चला आ रहा जनता का इंतजार खत्म हो गया। लोकार्पण के साथ ही शाम पांच बजे दोनों पुलों पर आवाजाही शुरू हो गई। दोनों पुलों के चालू होने से न सिर्फ बनारस बल्कि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक के लोगों को आवागमन में सहूलियत होगी।
शहर में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। सामनेघाट-रामनगर पुल पड़ाव-सोनभद्र-शक्तिनगर मार्ग को सीधे लंका, बीएचयू से जोड़ेगा। पड़ाव या फिर टेंगरा मोड़ से से चंदौली, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत आसपास के जिलों के बाशिंदे अब रामनगर होते हुए सीधे लंका आ-जा सकेंगे।
बीएचयू अस्पताल आने वाले मरीजों, रोजाना कामकाज के लिए बनारस आने वाले रामनगर और आसपास के जिलों के लोगों को सर्वाधिक सहूलियत होगी। पुल का निर्माण 2007 में शुरू कराया गया था लेकिन योगी सरकार ने इसे पूरा कराया।
इसी तरह, बलुआ घाट पुल बनने से बिहार और झारखंड के साथ ही सैदपुर, गाजीपुर, जमानिया, चंदौली के लिए सफर आसान होगा। रामनगर पुल के साथ ही इसकी भी आधारशिला रखी गई थी। पुल पर आवागमन शुरू होने की खुशी देखते बनी। बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे।
पुल से रामनगर किला और गंगा की लहरों के साथ सेल्फी ली। पुल पर बाइक दौड़ाई। शाम को खुशगवार मौसम के बीच कुछ लोगों ने हर-हर महादेव का जयकारा भी लगाया। आवागमन चालू होने के बावजूद रामनगर-सामनेघाट पुल पर लगाया गया ‘आगे रास्ता बंद है’ का बोर्ड देर शाम तक हटाया नहीं जा सका था।