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गणपति बप्पा को अर्पित की संगीत की श्रद्धा

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श्री गणेशोत्सव सेवा समिति की ओर से डिजिटल गणेश उत्सव के मंच पर विद्वतजनों का सम्मान हुआ। वहीं देर शाम को आभासी दुनिया के मंच पर संगीत समारोह स्वरांजलि में कलाकारों ने गणपति बप्पा मोरया को सुर, गायन और वादन की श्रद्धा निवेदित की।
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सोमवार को तीन दिवसीय शास्त्रीय संगीत समारोह स्वरांजलि की अंतिम निशा की शुरूआत अक्षय प्रताप सिंह ने शास्त्रीय गायन से हुई। उन्होंने राग बागेश्री अंग का चंद्रकौंस, मध्य विलंबित झपताल, विघ्रहरण श्रीगणेश.. की प्रस्तुति दी। उन्होंने द्रुत तीनताल में जो सुमिरत सिद्धि होई... सुनाकर समापन किया। द्वितीय प्रस्तुति में प्रो. राजेश शाह का सितार वादन हुआ। उन्होंने राग वाचस्पति, आलाप, जोड़, झाला, विलंबित, मध्य व दु्रत गत का वादन किया। तीसरी प्रस्तुति में रेणुका पुजारी ने भरतनाट्यम की मनोहारी प्रस्तुति दी। उन्होंने श्रीगणेश वंदना से शुरूआत करके पुष्पांजलि, देवी स्तुति, श्रीराम स्तुति, श्रीकृष्ण स्तुति, तथा शिव तांडव नृत्य से समापन किया। कार्यक्रम का संचालन ध्वनिमित्र पांडुरंग पुराणिक ने किया। प्रश्नमंच का संचालन रूपेश कस्तूरे ने किया।
श्रीराम जन्मभूमि शिलान्यास में समाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए तीन विद्वानों को सम्मानित किया गया। इसमें पं. गणेश्वर शास्त्री द्राविड़, पं. अरुण दीक्षित, और पं पांडुरंग पुराणिक को सम्मानित किया गया। पं. भालचंद्र विनायक बादल को पं. अनिल शास्त्री घोडेकर स्मृति वेद सम्मान प्रदान किया गया। संचालन षडानन पाठक और धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश कंठाले ने किया।
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गणेशोत्सव महोत्सव के नौवें दिन शहर में कई जगह गृहस्थों ने गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया। सुंदरपुर के रहने वाले प्रियरंजन ने गणपति बप्पा को जब विदाई दी तो परिजनों की आंखें भी नम हो उठीं। उन्होंने कहा कि नौ दिनों के बाद गणपति को विसर्जन करके हम लोगों ने फिर से उनसे जल्दी वापस आने की प्रार्थना की है। गणपति की प्रतिमा का सोशल डिस्टेंसिंग के साथ विसर्जन किया गया।
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