जान के खतरे से बेखौफ तड़के घर-घर अखबार बांट रहे लोग भी तो कोरोना योद्धा ही हैं। इन्हीं में से हैं- दीनानाथ। पूर्व महापौर राम गोपाल मोहले ने बुधवार दीनानाथ का सम्मान कर उनके काम के प्रति जज्बे और साहस को सराहा।
मोहले ने बताया कि सुबह को हर शख्स इनका इंतजार रहता है। दौर चाहे इस कोरोना जैसी खतरनाक महामारी का क्यों न हो, ये रुकते नहीं हैं। सुबह में साढ़े तीन बजे उठकर अपने घर लहरतारा बोलिया से पहुंच जाते हैं, जहां अखबार का सेंटर हैं। क्योंकि यह समाचार पत्र वितरक हैं।
अखबार का बंडल उठाया और बेखौफ निकल पड़े घर-घर पहुंचाने। सूचना के आदान-प्रदान की मजबूत कड़ी बने हुए दीनानाथ जान हथेली पर लेकर अपनी ड्यूटी को बिना रुके, बिना थके अंजाम देने में जुटे हैं। वो जानते हैं कि रुक गए तो लोग खबरों से महरूम हो जाएंगे। क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, किसने किया, क्यों हुआ लोगों को जानना जरूरी जो है।