श्रावणी पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है। रविवार को संस्कृत दिवस की पूर्व संध्या पर विचार व्यक्त करते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि श्रावणी पूर्णिमा अर्थात रक्षाबंधन, ऋषियों के स्मरण, पूजा और समर्पण का पर्व माना जाता है। संस्कृत दिवस समारोह तीन अगस्त को मनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस दौरान ऋषि पूजन का भी आयोजन किया जाएगा। वैदिक साहित्य में इसे श्रावणी कहा जाता है। इसी दिन गुरुकुलों में वेदाध्ययन कराने से पहले यज्ञोपवीत धारण कराया जाता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन ही प्राचीन भारत में शिक्षण सत्र आरंभ होता था। इसी दिन वेद पाठ का आरंभ होता था। प्राचीन काल में श्रावण पूर्णिमा से पौष पूर्णिमा तक अध्ययन चलता था। इसलिए इस दिन को संस्कृत दिवस के रूप में मनाया जाता है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से संस्कृत दिवस को संस्कृत सप्ताह के तौर पर मनाया जा रहा है। वेद विभाग में शोधरत वेदमूर्ति पशुपतिनाथ मिश्र तथा वादल गुरुपरंपरा के भविष्णु आचार्य वेदमूर्ति भालचन्द्र बादल घनपाठ परंपरा का निर्वहन करेंगे। विश्वविद्यालय के फेसबुक पेज पर तीन अगस्त को 4:30 बजे से इसका लाइव प्रसारण होगा। 2020 के संस्कृत दिवस को मनाने की अपील यूजीसी ने भी की है। संस्कृत भाषा के प्रोत्साहन के माध्यम से विश्व में प्राचीन ज्ञान धारा का प्रोत्साहन तथा संरक्षण संवर्धन करना संस्कृत दिवस का लक्ष्य है।