वाराणसी। लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय नेपाल के कुलपति प्रो. हृदय रतन वज्राचार्य ने कहा कि शुद्धाचरण एवं सदाचार ही धर्म के स्पष्ट चिन्ह हैं। एक दूसरे के प्रति सहिष्णु होना ही धर्म का सत्य स्वरूप है। वह रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित सर्वधर्म समागम समारोह को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे।
सामाजिक सौहार्द में सामाजिक भूमिका विषयक वेबिनार में बीएचयू के पाली विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेंद्र ने कहा कि जब हमारा मन स्वस्थ रहता है तब समाज में सौहार्द एवं समरसता के लिए हम व्याकुल हो जाते हैं। श्रमण विद्या संकाय के अध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद ने कहा कि विचारों के प्रवाह में कई धर्मों का प्रादुर्भाव हुआ। लोगों के कल्याणार्थ ही महापुरुष धरती पर आते रहे हैं। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि सभी धर्मों के मूल में सौहार्द का भाव ही है। कोई भी धर्म द्वेष करना नहीं सिखाता। हर जीव सुख चाहता है जीवन सभी प्राणियों को प्रिय है।
अखिल नेपाल भिक्षु संघ के अध्यक्ष भदंत मैगे महावेरो ने कहा कि परस्पर सम्मान से ही सद्भाव संभव है। इस दौरान प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो. अनेकांत जैन, प्रो. मुहम्मद रियाज अहमद, प्रो. हरपाल सिंह पल्लू, डॉ. चन्द्रकांत कुमार एवं मदंत तेजवेरो थेरो ने अपने विचार व्यक्त किए।