बच्चों को बचाने वाली बहादुर बिटिया रूबी
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सब हमसे छोटे थे, उन्हें लग रहा था कि घूम ही रहे हैं
चौखंडी स्तूप के समीप मलिन बस्ती में रहने वाला राजू पुरातात्विक खंडहर परिसर में साफ सफाई का काम करता है। उसकी नौ वर्षीय पुत्री रूबी अपनी बस्ती के तीनों बच्चों को लेकर घर लौटी तो सभी अपने-अपने बच्चों को सीने से लगा लिए। रूबी ने बताया कि बाकी तीनों बच्चे उससे छोटे थे। उन्हें लग रहा था कि वह घूम रहे हैं।
जब वह टोटो चालक की बेंचने वाली बात सुनी तो उसे शंका हुई और लगा कि कुछ गड़बड़ है। इसके बाद तीनों बच्चों को वह टोटो से नीचे उतारी और चुपचाप अंधेरे में ही चल दी। लगभग दो किलोमीटर तक छुपते-छुपाते हुए वह अपनी बस्ती पहुंची तब जाकर जान में जान आई। रूबी की बातें सुनकर उसके साहस और सूझबूझ की सभी ने तारीफ की।