बीएचयू में बीते तीन साल में हाईकोर्ट में किए गए खर्चों का ब्योरा रहस्य बना गया है। एक प्रोफेसर ने आरटीआई करके बीते तीन साल में कोर्ट केस में खर्च की गई धनराशि का हिसाब मांगा। जवाब में खर्चों का ब्योरा तो नहीं मिला, लेकिन दो कार्यालयों ने एक-दूसरे को सवालों का कागज फॉर्वर्ड कर दिया है।
आरटीआई आवेदनकर्ता से कहा कि आपकी ओर से मांगे गए विवरण के अनुसार, जवाब कार्यालय में नहीं है। जवाब न मिलने पर प्रथम अपील भी की गई, जिसको लेकर ट्रेड बिल अनुभाग ने दोबारा लीगल सेल को आवेदन का निस्तारण करने का निर्देश दे दिया है।
बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के डॉ. सुशील दुबे की ओर से आरटीआई की गई थी। इसमें तीन सवाल पूछे गए थे। 2022 से 2025 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट में लीगल सेल ने कितना खर्च किया है। लीगल सेल ने 2022 से 2025 तक किसी भी न्यायालय में वकीलों को कुल कितनी फीस दी। विश्वविद्यालय का पक्ष रखने के लिए 2022 से 2024 तक कितना धन व्यय किया गया।
सिर्फ बिल फॉर्वर्ड करता है लीगल सेल
इन सवालों पर लीगल सेल का जवाब आया कि ऑफिस में उपलब्ध रिकॉर्ड को देखते हुए आवेदन के अनुसार मांगी गई सूचनाओं का जवाब समेकित रूप से उपलब्ध नहीं है। लीगल सेल सिर्फ बिल ही फॉर्वर्ड करता है। बीएचयू के ट्रेड बिल सेक्शन को फाइनल पेमेंट के लिए बिल भेजा जाता है। वहीं, ट्रेड बिल अनुभाग ने जवाब दिया है कि वांछित सूचना समेकित रूप में मांगे गए विवरण के अनुसार हमारे कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।