परंपरा को पटखनी :
दो साल पहले नागपंचमी पर बेटियों ने मिट्टी में सनकर कुश्ती के दांव-पेंच दिखाकर अखाड़ों पर सिर्फ और सिर्फ लड़कों का दावा खत्म किया था। इसके बाद 478 साल पुराने अखाड़ा तुलसीदास ने अपनी परंपरा को तोड़ते हुए महिला पहलवानों को अपने यहां कुश्ती लड़ने की अनुमति दी थी। इस बार उससे भी आगे जाकर बेटियां गदा, जोड़ और डंबल फेरती नजर आईं।