वाराणसी। पिछले साल नवंबर से दिसंबर के बीच हुए एमएलसी चुनाव के दौरान वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी करने वाले कैमरा संचालकों ने मेहनताना न मिलने पर बुधवार को विकास भवन स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय में हो हल्ला मचाया। कार्यालय में मौजूद अधिकारी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
उनका आरोप था कि एमएलसी चुनाव के दौरान नामांकन से लेकर मतगणना तक जिला निर्वाचन अधिकारी के द्वारा जारी पत्रों के मुताबिक वीडियोग्राफी की गई। जिसकी मजदूरी चार लाख 87 हजार 900 रुपये हुई है। इसे जारी करने में निर्वाचन अधिकारी आनाकानी कर रहे हैं।
कैमरा संचालक रामअवतार गिरी ने निर्वाचन अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए बताया कि पिछले साल 11 नवंबर से तीन दिसंबर के बीच एमएलसी चुनाव के दौरान 50 से अधिक कैमरामैन ने वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जिसमें हमारी कुल मजदूरी चार लाख 87 हजार 900 रुपये की बनती है। मगर अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ 87000 ही मिलेगा। जो बिल्कुल गलत है। हम अपनी पूरी मजदूरी की मांग पिछले तीन महीने से कर रहे हैं। जिसको लेकर विभागीय अधिकारी हिलाहवाली कर रहे हैं। हालांकि देर शाम तक सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी दयाशंकर उपाध्याय के आश्वासन पर धरने पर बैठे सौरभ, शिव कुमार, मनीष, रोशन, धीरज, विक्की, विकास सहित दर्जनों कैमरा संचालक अपने अपने घर लौट गए।
इनसेट...
वर्ष 2011 में भी गबन कर ली गई थी मजदूरी
रामअवतार ने बताया कि पिछले 2005 से निर्वाचन कार्यालय से जुड़कर हर चुनाव में वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कर रहे है। साल 2011 में भी हमारी मजदूरी हड़प ली गई थी। 150 मानव दिवस के तहत 50 कैमरा संचालकों ने काम किया। मगर अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला।
कोट..
कैमरा संचालकों से वीडियोग्राफी का बैकअप मांगा गया है। सत्यापन होने के बाद बजट की मांग की जाएगी।
- रणविजय सिंह, उप जिला निर्वाचन अधिकारी