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आपत्तियां दर्ज कराने वालों पर आयोग की नजर

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वाराणसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए सीटों के आरक्षण के बाद अब आपत्तियां दर्ज कराने का दौर शुरू हो गया है। ऐसे लोगों पर आयोग की पैनी नजर है जो आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं। चुनावी समीकरण बिगड़ने से असंतुष्ट दावेदार ज्यादातर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। अनंतिम आरक्षण सूची जारी होने के बाद अब तक 300 से अधिक आपत्तियां आईं हैं। इनके निस्तारण के लिए कमेटी बनाई गई है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से जाति प्रमाण पत्र लिया जाएगा। इसके लिए चुनाव आयोग ने गाइडलाइन जारी कर दी है।
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डीपीआरओ के अलावा ब्लॉकों पर भी आपत्तियां ली जा रही हैं। संबंधित कार्यालयों में आपत्तियां एकत्र करने के लिए कर्मचारियों को लगाया गया है। आठ मार्च तक दावे और आपत्तियां ली जाएंगी। डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी 10 से 12 मार्च के बीच दावे और आपत्तियों का परीक्षण और निस्तारण करेगी। 13 से 14 मार्च के बीच इन सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। आपत्तियां एकत्र कर रहे अधिकारी ने बताया कि हर इलाके से ज्यादातर वही लोग दावे और आपत्तियां दाखिल कर रहे हैं, जिनका चुनावी समीकरण आरक्षण की अनंतिम सूची जारी से बिगड़ गया है। ऐसे लोग खुद भी आपत्तियां दाखिल कर रहे और दूसरे लोगों से भी दावे और आपत्तियां दाखिल करवा रहे हैं। जिन इलाकों से आपत्तियां आ रही हैं। वहां मतदान केंद्र की संवेदनशीलता निर्धारित करने में उसे शामिल किया जाएगा। इन इलाकों में ऐसे लोगों के बारे में छानबीन की जाएगी, जो असंतुष्ट हैं और चुनावी माहौल बिगाड़ सकते हैं। डीपीआरओ शास्वत आनंद सिंह ने बताया कि तीन सौ से अधिक शिकायतें आई हैं। इनका निस्तारण किया जाएगा।
उधर, ग्राम सभा सरांय विकास खण्ड-पिण्डरा को अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित करने की मांग को लेकर बबलू राम ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने कहा कि आज तक प्रधान पद के लिए अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण नहीं हुआ है। लगातार पिछड़ी व सामान्य सीट ही सुरक्षित चली आ रही है। इसके पूर्व में कई बार प्रार्थना पत्र दिए. लेकिन उस पर विचार नहीं किया गया।
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विवाह मात्र से नहीं बदलेगी जाति
पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण के बाद कईयों के समीकरण बिगड़ गए हैं। अमूमन लोग दूसरी जाति में विवाह करके आरक्षण का लाभ लेने का प्रयास करते हैं। लेकिन चुनाव आयोग की गाइड लाइन के अनुसार विवाह करने मात्र से व्यक्ति की जाति नहीं बदलेगी। जन्म से ही व्यक्ति की जाति का निर्धारण होता है। पंचायत के सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी राजाराम वर्मा ने बताया कि महिला या पुरुष किसी भी जाति में विवाह करें। तब भी उस महिला व पुरुष की जाति जन्म से मानी जाती है। अत: ऐसे लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाएगा। जन्म से जिस व्यक्ति की जाति होगी वही जाति मानी जाएगी।
चुनाव चिन्ह में कोई पाएगा तीर धनुष तो कोई गदा चारपाई
आयोग की सूची में चुनाव चिन्ह के रूप में ओखली मौजूद है। इसी प्रकार करनी, गदा, चारपाई, टोकरी, डेस्क, तांगा, ड्रम, धनुष, फावड़ा, पालकी, बांसुरी, बैलगाड़ी, आटा चक्की, कुआं, गुल्ली डंडा, भगोना, तलवार, सरौता, टाइप राइटर, तराजू, फावड़ा-बेल्चा, लट्टू, हल, हथ-ठेला, सपेरा, डमरू, फरसा, शंख, खड़ाऊं, , स्लेट, हंसिया, हारमोनियम, कलम दवात, आदि चुनाव-चिह्न वर्षों से जस के तस हैं।
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