वाराणसी। अपर सत्र न्यायाधीश दशम देवाशीष की अदालत ने रुस्तमपुर के तिहरे हत्याकांड में आरोपी सज्जन, छन्नू, राजू, अजय कुमार, मोबिन और अंसार अली को आरोप सिद्ध न होने पर बरी कर दिया। यह घटना साढ़े 10 वर्ष पहले की है।
जैतपुरा निवासी ओमप्रकाश यादव ने 8 अगस्त 2010 को चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि रुस्तमपुर स्थित उसके घर में रायबरेली निवासी पीर अली किरायेदार के रूप में रहता था। 6 अगस्त 2010 को पीर अली रायबरेली स्थित अपने घर गया था। इस दौरान मकान में की पत्नी जरीना और उसकी बेटी सलमा अकेले थी। 8 अगस्त को रायबरेली से पीर अली वापस लौटा तो देखा कि बरामदे में उसकी पत्नी, बेटी और मकान मालकिन रामरती देवी का शव पड़ा हुआ है। इसकी जानकारी चौबेपुर थाने को दी गई।
मुकदमे की विवेचना में पीर की पहली पत्नी के पुत्रों सज्जन, छन्नू, सज्जन के पुत्र राजू निवासी जगतपुर रायबरेली के अलावा अजय कुमार मोबिन और अंसार अली के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में प्रेषित किया गया था। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता संजय राय के मुताबिक घटना के बाद अज्ञात में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवाद का कारण बताया गया था कि पीर अली की जरीना दूसरी पत्नी थी और संपत्ति विवाद में पहली पत्नी के पुत्रों ने रायबरेली से आकर चापड़ से हत्या कर दी थी।
जरीना और सलमा की हत्या करते हुए रामरती देवी ने देख लिया था तो हमलावरों ने उसे भी मार डाला था। मामले में विचारण के दौरान दो गवाह पक्षद्रोही हो गए और अन्य गवाहों ने अभियोजन पक्ष के बयानों का समर्थन नहीं किया। अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया।