स्नातक और स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों की परीक्षाओं पर स्थितियां साफ नहीं हो सकी हैं। विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षाओं की तैयारियां तो मुकम्मल हैं लेकिन अभी तक शासन की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। वहीं जिलों के महाविद्यालयों में परीक्षा केंद्र को लेकर परेशानियां बढ़ गई हैं। कई महाविद्यालयों ने कोरोना संक्रमण के कारण परीक्षा केंद्र में परिवर्तन की मांग की है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में पांच जिलों के महाविद्यालयों में अंतिम वर्ष के छात्रों की संख्या लगभग 80 हजार के आसपास है। विश्वविद्यालय की ओर से परीक्षाएं मार्च में शुरू करा दी गई थीं और 40 फीसदी परीक्षाएं हो चुकी थीं। कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन में परीक्षाओं को रोकना पड़ा। ऐसी हालत में विश्वविद्यालय की तो परीक्षा की तैयारियां पूरी हैं। कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य का कहना है कि शासन से जो भी आदेश मिलेगा उसी हिसाब से निर्णय लिया जाएगा।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में भी परीक्षा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। हालांकि देश भर में संबद्ध महाविद्यालयों के होने के कारण कापी और पेपर के वितरण में समस्या आ सकती है। क्योंकि महाविद्यालय का प्रतिनिधि ही कापी और पेपर लेने के लिए विश्वविद्यालय आता है। कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य हुई तो विश्वविद्यालय की परीक्षाएं कराई जा सकती हैं। अभी फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में रहने वाले विदेशी छात्र भी अपने-अपने देश जा चुके हैं। इसमें नेपाल, मॉरीशस, श्रीलंका आदि देशों के छात्र शामिल हैं। वहीं रेड जोन में आने वाले कई महाविद्यालयों ने तो परीक्षा केंद्र को भी बदलने की बात कही है। कुलसचिव राजबहादुर का कहना है कि परीक्षा की तैयारियां पूरी हैं। शासन से जो भी आदेश प्राप्त होगा उस हिसाब से परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा।