सावन मनभावन होता है। प्रकृति, मनुष्य और देव हर किसी के लिए इस ऋतु का आनंद ही अद्भुत होता है। भगवान शिव की भक्ति को समर्पित यह महीना भी शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है। महादेव भी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को विविध स्वरूपों में दर्शन देते हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि काशीपुराधिपति सावन के हर सोमवार को विविध स्वरूप धरते हैं।
भक्त बाबा के पंच स्वरूपों का शृंगार करते हैं और दर्शन कर धन्य-धन्य हो जाते हैं। इस बार सावन में पांच सोमवार दो प्रदोष व मास शिवरात्रि भी पड़ रही है। यह सुखद संयोगों का सावन है। बाबा की नगरी काशी मेउनका अलग-अलग रूप शृंगार किया जाता है। हर सोमवार विशिष्ट शृंगार में अलग ही रंग नजर आता है जो भक्तों को मुग्ध व विभोर कर जाता है। पूर्व अध्यक्ष का कहना है कि महादेव तो सिर्फ जल से ही प्रसन्न होने वाले देव हैं। वह भक्त का केवल भाव देखते हैं। श्रद्धा देखते हैं और अपनी कृपा से उसको अभिसिंचित कर देते हैं।
जब शिव कृपा बरसाते हैं तो जीवन में कुछ भी अप्राप्य नहीं रह जाता है। यह साधना का महीना है। अपने अभीष्टï की सिद्धि का मास श्रावण मास है। शिव स्वरूप में विराजते हैं प्रभु श्री काशी विश्वनाथ का प्रथम सोमवार को शिव स्वरूप में दर्शन होता है। लिंग पुराण के अनुसार भगवान शिव ज्योर्तिलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे। इसलिए पहला शृंगार मानव आकृति के रूप में किया जाता है। शिवशक्ति का होगा दर्शन सावन केदूसरे सोमवार को भक्त बाबा विश्वनाथ के शिव शक्ति स्वरूप के दर्शन करते हैं।
इस दिन बाबा के ज्योतिर्लिगिं पर शिवशक्ति के स्वरूप में विग्रह शृंगार किया जाता है। अद्र्धनारीश्वर स्वरूप है मनभावन सावन के तीसरे सोमवार को भगवान शिव का अद्धनारीश्वर स्वरूप भक्तों के लिए होता है। मनुस्मृति के अनुसार महादेव ने स्वयं को दो भागों में विभक्त करके अद्र्धनारीश्वर स्वरूप के दर्शन कराए थे। रुद्राक्ष से सजेगा बाबा का मंदिर सावन के चौथे सोमवार को बाबा विश्वनाथ का रुद्राक्ष शृंगार किया जाता है। इसमें रुद्राक्ष के दाने से बाबा की झांकी सजाई जाती है, मंदिर केपरिसर में भी रुद्राक्ष सजाए जाते हैं। इसे प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया जाता है। परिवार संग झूलेंगे काशीपुराधिपति श्रावण पूर्णिमा पर पड़ रहे पांचवें सोमवार को काशीपुराधिपति सपरिवार झूले पर विराजमान होंगे। श्रद्धालुओं को भगवान विश्वेश्वर चांदी के झूले में शिव-पार्वती, कार्तिकेय और गणेश के साथ दर्शन देते हैं।