इस तरह से होता है तैयार
आटे की लोई में पीसी हुई उड़द की दाल की थोड़ी मसालेदार पीठी भरकर, उसे बेलकर देसी घी की कढ़ाई में तैराना और फिर गरमागरम सब्जी के साथ परोसा जाता है। इस शानदार कचौड़ी के साथ केसरिया जलेबी। ये बनारस का राजसी नाश्ता है।
आइए जानते है इनका इतिहास-
इनके इतिहास पर थोड़ा गौर करें तो कचौड़ी शब्द मूल संस्कृत शब्द कच और पूरिका से है, जो कि कचपूरिका घिसते-घिसते कचउरिया हो गया। संस्कृत में कच का मतलब होता है बाँधना या बंधन। असल में पहले कचौड़ी पूरी के आकार की न होकर मोदक के आकर की होती थी, जिसमें आटे या मैदे की लोई में ख़ूब सारा मसाला भर कर बांध दिया जाता था, इसलिए उसे कचपूरिका कहा जाता था। वहीं दूसरी ओर यह जानकर आश्चर्य होगा कि जलेबी मूल रूप से अरबी भाषा का एक शब्द है और अरब से आयी इस मिठाई को जलाबिया कहा जाता है। जिससे शब्द जलेबी मिला।