कांग्रेस से छह, सपा से चार और तीन निर्दलों के पर्चे दाखिल
वाराणसी जिला योजना समिति के सदस्य पदों के लिए चुनाव से भाजपा ने किनारा कर लिया है। इसका सीधा फायदा सपा और कांग्रेस को मिल गया है। मंगलवार को सपा, कांग्रेस और निर्दल समेत 13 उम्मीदवारों ने 13 पदों के लिए नामांक न कराया है।
जांच के बाद 24 मार्च को आधिकारिक रूप से सभी 13 उम्मीदवारों की जीत की घोषणा कर दी जाएगी। इस घटनाक्रम से राजनीतिक दलों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
जिला योजना समिति के लिए नगर निगम के निर्वाचित पार्षदों, रामनगर नगरपालिका के सभासदों और गंगापुर नगर पंचायत के सदस्यों में से 13 सदस्य चुने जाते हैं। निर्वाचित सदस्यों का कार्यकाल पांच साल होता है।
ये सदस्य ही जिला योजना समिति की बैठक में भाग लेते हैं। मंगलवार को 13 पदों के लिए नामांकन होना था। सपा जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव, महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, रमेश राजभर, जितेंद्र यादव, कांग्रेस के महानगर अध्यक्ष सीताराम केशरी, रामनगर नगरपालिका अध्यक्ष रेखा शर्मा और बसपा के प्रदीप मौर्या पहुंचे थे।
शाम चार बजे तक भाजपा के दावेदारों का इंतजार होता रहा लेकिन कोई भी नामांकन कराने नहीं पहुंचा। तकरीबन साढ़े तीन बजे एडीएम प्रशासन एमएन उपाध्याय के न्यायालय में 13 उम्मीदवारों ने 13 पदों के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए। कांग्रेस से 6, सपा से 4 और तीन प्रत्याशियों ने निर्दल के रूप में नामांकन किया। बसपा की ओर से किसी ने नामांकन नहीं किया।
...तो हार के डर से भाजपा ने चुनाव से दूरी बनाई
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जिला योजना समिति के 13 सदस्य पदों के लिए चुनाव के लिए नामांकन करने से अलग रहने की राजनीतिक हल्कों में मुद्दा बन गया है। इसकी अलग-अलग तरह से व्याख्या भी की जा रही है।
पार्टी विरोधी इसे जहां संख्या बल की कमी, सपा-बसपा और कांग्रेस की एकजुटता से लेकर फूलपुर और गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में मिली हार के असर के तौर पर देख रहे हैं तो भाजपा में इस चुनाव के लिए न तो तैयारी थी और न ही इसके लिए रणनीति बनाई गई थी।
शायद इसीलिए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और काशी क्षेत्र के अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य ने इसे जिला इकाई और जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी बताते हुए पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया।
वाराणसी नगर निगम, रामनगर नगरपालिका और गंगापुर नगर पंचायत की कुल 125 सीटों में से 78 पर विपक्षी दलों और निर्दलीयों का कब्जा है। भाजपा के पास केवल 47 सीटें हैं। माना जा रहा है कि चुनाव की नौबत आती तो आंकड़ों के आधार पर भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिलती।
दरअसल, हाल में सपा-बसपा और कांग्रेस के बीच बड़ी नजदीकियों को भाजपा समझ ही नहीं पाई थी, जबकि विपक्षी दल इस मौके की ताक में थे। रणनीति के तहत ही इन दलों ने निर्दलीयों को भी साध लिया।
जानकारों की मानें तो भाजपा अगर 23 निर्दलीयों में से आधे को भी अपने पक्ष में कर लेती तो उसकी संख्या 60 तक पहुंच जाती और चुनावी मुकाबले में आ सकती थी।
नगर निगम में भाजपा का बहुमत है। यहां मेयर मृदुला जायसवाल के साथ ही भाजपा के 41 पार्षद हैं। रामनगर नगर पालिका और गंगापुर नगर पंचायत में भाजपा कमजोर है। रामनगर नगरपालिका अध्यक्ष रेखा शर्मा और गंगापुर नगर पंचायत अध्यक्ष दिलीप सेठ कांग्रेस के हैं।