उसी ने कुछ पुलिस कर्मियों को किसी हवाला कारोबारी की बड़ी रकम के लेन-देन के काम में मदद के लिए खोजवां क्षेत्र में बुलाया था। उसने मदद करने के नाम पर पुलिस को तगड़ी रकम देने की बात भी कही थी। इसी बीच मामला धीरे-धीरे होते हुए उच्चाधिकारियों तक पहुंच गया और रुपये से संबंधित सभी लोग भाग खड़े हुए। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ही आनन-फानन रकम बरामद की गई। चर्चा रही कि रकम का एक तगड़ा हिस्सा गायब भी हो गया है, इस संबंध में कुछेक पुलिस कर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। हालांकि इस बारे में पूछे जाने पर अफसरों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
पुलिस ने भले ही 92.94 लाख रुपये बरामद किया, लेकिन इस संबंध में पत्रकारों को जानकारी देने के सवाल पर भेलूपुर थानाध्यक्ष से लेकर काशी जोन तक के उच्चाधिकारी चुप्पी साधे हुए थे। इसे बारे में पुलिस आयुक्त मुथा अशोक जैन को बताने पर उनके निर्देश पर रात 12 बजे के बाद बरामद नकदी के बारे में जानकारी सार्वजनिक की गई। वहीं, आमतौर पर एक स्कूटी या मोपेड भी बरामद होती है तो पुलिस उसका रंग, कंपनी और रजिस्ट्रेशन नंबर जरूर साझा करती है। लेकिन, इतनी बड़ी बरामदगी के बाद भी कार के विवरण को लेकर पुलिस मौन साधे रही।