मंत्री रविंद्र जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2011 में अमृत योजना के तहत वरुणापार क्षेत्र में सीवर और पेयजल से जुड़े कार्य कराए गए थे। हालांकि, करीब 60 फीसदी क्षेत्र में काम शेष रह गया था। अब नई परियोजना के तहत बचे हुए क्षेत्रों को भी सीवर और पेयजल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। इसके तहत 15 वार्डों के शत-प्रतिशत क्षेत्र को सुविधा से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में मंत्री ने जल निगम के अभियंताओं को सड़क खुदाई के दौरान विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवर लाइन बिछाने के लिए एक साथ लंबी दूरी तक सड़क की खुदाई न की जाए। जिस हिस्से में सड़क खोदी जाए, वहां पहले सीवर लाइन बिछाने का काम पूरा किया जाए। इसके बाद सड़क को आवागमन योग्य बनाने के बाद ही अगले हिस्से में खुदाई शुरू की जाए।
पेयजल पाइपलाइन बिछाने के दौरान भी इसी व्यवस्था का पालन करने को कहा गया। इससे निर्माण कार्य के दौरान लोगों को आवागमन में कम परेशानी होगी और सड़कों को लंबे समय तक खुदा छोड़ने की स्थिति से बचा जा सकेगा। अधिकारियों को कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।