तारा सुंदरी की समाधि पर है मां तारा का मंदिर
देवनाथ पुरा मोहल्ले में पांडेय घाट पर स्थित तारामाता के मंदिर की कहानी भी अनोखी है। बाहर से यह एक पुरानी कोठियों जैसा नजर आने वाला यह मंदिर अंदर से एक बड़ी-सी हवेली की तरह भव्य है। मंदिर की मूर्ति की नींव में राजकुमारी की जीवित समाधि है। तंत्र की देवी मां तारा को समर्पित मंदिर का निर्माण बंगाल के नाटोर की रानी भवानी ने 1752 से 1758 के बीच करवाया था।
वर्ष में एक ही दिन मां स्वीकार करती हैं भक्तों का भोग
काशी की नौ गौरियों में एक विशेष गौरी हैं, जो वर्ष में एक बार ही अपने भक्तों का भोग प्रसाद स्वीकार करती है। शेष वर्ष के 364 दिन वह उपवास करती हैं। हम बात कर रहे हैं मां अंबिका गौरी की।
मृत्युंजय महादेव मार्ग पर रत्नेश्वर मंदिर के सामने सतीश्वर महादेव मंदिर में मां अंबिका गौरी का विग्रह विराजमान है। चैत्र नवरात्र की चतर्थी पर ही माता को भोग लगाया जाता है। इसके अलावा बाकी 364 दिन माता उपवास करती हैं।
वहीं, काशीखंड में वर्णित है कि जगत्विख्यात् देवाधिदेव महादेव एवं श्रीहरि विष्णु की प्रिय नगरी काशीपुरी के पग-पग पर स्थित देवतीर्थ स्थानों पर जगत जननी माता अपने मुखनिर्मालिका गौरी, ज्येष्ठागौरी, सौभाग्यगौरी-शृंगारगौरी, शान्तिकरी गौरी, विशालाक्षी गौरी, ललितागौरी, भवानीगौरी, मंगलागौरी और अन्य विभिन्न स्वरूपों में विद्यमान हैं।
कोर्ट कचहरी से मुक्त कर देती हैं बंदी देवी
प्रयागघाट पर स्नान करके जो व्यक्ति बंदीदेवी का दर्शन कर लेता है उसे जीवन में कभी लोहे की बेड़ियों से नहीं बांधा जाता। बंदी देवी का मंदिर दशाश्वमेध घाट पर स्थित है, जहां देवी को फूल माला की जगह ताला चाबी चढ़ाई जाती है।
पाताल लोक की देवी बंदी देवी का मंदिर पूरे विश्व में इकलौता मंदिर बनारस में ही है। काशी खंड के अनुसार कैद, जेल से छुटकारा पाने की इच्छा से जो मनुष्य प्रत्येक मंगलवार को भक्तिपूर्वक केवल एक ही बार भोजन करके काशी में निगडभंजनी देवी अर्थात बंदी देवी का पूजन करता है तो देवी पूजित हो जाने पर सभी बंधनों को काट डालती हैं।