वाराणसी में एयर शो का आज होगा समापन।
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गंगा से रखी जा रही पक्षियों पर निगरानी
एटीसी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ज्यादातर विमान प्रयागराज बमरौली बेस से ही उड़ान भरकर काशी पहुंच रहे हैं। वहां से चलने के बाद सभी विमान काशी के होल्डिंग एरिया में आ जाते हैं। दूसरी ओर एयरफोर्स के कई जवान गंगा में बोट से और घाट पर एटीसी के पास दूरबीन और अन्य उपकरणों से पक्षियों के उड़ने की निगरानी कर रहे हैं। उनकी गतिविधियों पर बाकायदा नजर बनाए हुए हैं। जैसे ही प्रदर्शन स्थल पर कोई पक्षी आता है तो उनका रियल टाइम लोकेशन एटीसी को दे दिया जाता है। इसके बाद विमान में बैठे पायलट तक मेसेज पहुंच जाता है। यदि वे चल चुके हैं तो अपने रूट में थोड़ा-बहुत बदलाव कर करतब दिखाते हैं।
मंदिर के ढरोखे से एयर शो।
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गंगा पर करतब दिखाने वालों में नेवी के भी पायलट
गंगा में वायुसेना के इस शो में नौसेना के भी अधिकारियों की मौजूदगी रही। दिल्ली से आए नेवी के एक अधिकारी ने बताया कि जल के समीप जो भी एयरक्राफ्ट या हेलिकॉप्टर उड़ते हैं, उसमें नेवी के भी पायलट होते हैं। करीब तीन पायलट इस शो में अपना करतब दिखाकर जा चुके हैं। त्रिदेव फॉर्मेशन का नेतृत्व नेवी के कामोव हेलिकॉप्टर ने किया। इसमें थल सेना का एएलएच एमके-3 हेलिकॉप्टर भी था। दरअसल समुद्र में एयरक्राफ्ट कैरियर में जब किसी भी लड़ाकू विमान या हेलिकॉप्टर को उतारा या टेकओवर कराया जाता है तो उस समय नेवी के पायलट होते हैं क्योंकि रनवे का सतह छोटा और बेहद हिलता-डुलता रहता है। इसका अंदाजा नेवी के पायलट अच्छे से लगा लेते हैं।