काशी-तमिल संगमम में शामिल होने के लिए तमिल श्रद्धालुओं का पांचवां दल नर्मदा सोमवार को काशी पहुंचा। इन दक्षिण भारतीय मेहमानों का ढोल-नगाड़े की थाप के बीच स्वस्ति वाचन और फूलों की वर्षा से स्वागत किया गया। इसके बाद काशी विश्वनाथ के दर्शन किए। बाबा को जल अर्पण करने के बाद दल के लोग शंकराचार्य चौक परिसर में इकट्ठा हुए। इसके बाद श्रद्धालुओं ने लोकनृत्य और गीतों के माध्यम से बाबा की स्तुति की। मंदिर में पुजारियों ने उन्हें मंदिर के इतिहास आदि की जानकारी दी। श्रद्धालुओं ने तट पर जाकर मां गंगा को प्रणाम किया। इसके पश्चात श्रद्धालु माता विशालाक्षी और मां अन्नपूर्णा से आशीर्वाद लेने उनके दरबार पहुंचे और मत्था टेका। ब्यूरो
चित्र प्रदर्शनी में मिली जानकारियां, सनबीम के बच्चे पुरस्कृत
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ पल्लियाकर युद्ध को प्राय: भारतीय स्वतंत्रता के शुरुआती संघर्षों में एक माना जाता है। रानी वेलु नचियार ब्रिटिश शासन का सक्रिय रूप से विरोध करने वाली रानी थीं। तमिलनाडु के रामनाथपुरम में 1730 नचियार ने सिपाही विद्रोह से कई साल पहले ब्रिटिश शासकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी l 1700 के दशक के अंत में उन्होंने महिला सैनिकों को प्रशिक्षित किया और पहला मानव बम बनाया। ये जानकारियां नमो घाट पर काशी-तमिल संगमम में केंद्रीय संचार ब्यूरो, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, केंद्र सरकार, लखनऊ की ओर से आयोजित चित्र प्रदर्शनी में दी जा रही है। प्रदर्शनी देखने आए सनबीम लहरतारा के विद्यार्थियों के बीच प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता हुई। सही जवाब देने वाले छात्र वंदन देव, अनमोल कश्यप, सत्यम केशरी, श्रेयांशी, मोहित केजरीवाल को केंद्रीय संचार ब्यूरो की ओर से पुरस्कृत किया गया।