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काशी की मूल संस्कृति के प्रतिनिधि थे उस्ताद बिस्मिल्लाह खां

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भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर शनिवार को यादें समारोह के जरिये भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। महमूरगंज में दीपिका कल्चरल सोसायटी आफ इंडिया की ओर से आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले ने शहनाई वादक पं. दुर्गा प्रसन्ना को बिस्मिल्लाह खान सम्मान प्रदान किया।
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की स्मृतियों को ताजा करते हुए पूर्व महापौर रामगोपाल मोहले ने कहा कि खां साहब न सिर्फ शहनाई के बेताज बादशाह थे बल्कि संगीत जगत में काशी की मूल संस्कृति के सशक्त प्रतिनिधि भी थे। उनकी शहनाई के सुरों में काशी की लोक संस्कृति और परंपराओं की मखमली खुशबू उन्हें अलग मकाम और पहचान देती थी। मुहर्रम के मौके पर अपनी शहनाई की दर्द भरी धुनों से जब वे आंसुओं का नजराना पेश करते थे तो न सिर्फ दुनिया की बेमिसाल शहादत की याद ताजा हो जाती बल्कि उस मंजर के दर्दों गम से हजारों लोगों की आंखें नम हो जातीं। शहनाई वादक पंडित दुर्गा प्रसन्ना ने कहा कि मरहूम खां साहब ने शहनाई को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया उसके लिए समूचा संगीत जगत उनका ऋणी रहेगा। संस्था के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बिस्मिल्लाह खां की स्मृतियों को साझा किया।
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