जर्जर हो रहा वह घर, जहां बसी है उस्ताद की याद
सम्मानों के साथ उस्ताद के जीवन से जुड़ी तमाम वस्तुएं भी उसी घर में रखी हैं। उनका रहने वाला कमरा जर्जर हो चुका है। बारिश के दौरान घर में नमी बढ़ने से सामान को और नुकसान पहुंच रहा है। उस्ताद की शहनाई, शेरवानी, टोपी, पंखा, आलमारी, ताड़ का पंखा, खाने के बर्तन और देश-विदेश में उनके कार्यक्रमों के दौरान खींची गई तस्वीरें भी संरक्षण के अभाव में खराब हो रही हैं।
इन वस्तुओं की अहमियत इस लिहाज से भी अधिक है कि वे उस्ताद के जीवन, उनकी दिनचर्या और दशकों लंबी संगीत साधना की प्रत्यक्ष गवाह हैं। इनके नष्ट होने का अर्थ केवल पुराने सामान का खराब होना नहीं, बल्कि संगीत इतिहास के एक हिस्से का हमेशा के लिए खो जाना होगा।
संग्रहालय की पहल भी परिवार के समन्वय में अटकी
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पैतृक घर को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की पहल भी पहले सामने आ चुकी है, लेकिन परिवार के सदस्यों के बीच समन्वय नहीं बनने से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। परिवार के भीतर मतभेद और अलग-अलग राय के कारण उस्ताद की विरासत को एक जगह संरक्षित करने की कोशिशें अटकती रही हैं। जरीना बेगम का कहना है कि परिवार के सभी सदस्यों के बीच समन्वय बनाकर उस्ताद की निशानियों को सहेजने का प्रयास किया जा रहा है।
कोशिश की जा रही है कि आपस में समन्वय बनाकर अब्बा की निशानियों को सहेजा जाए। जो पद्म सम्मान खराब हो गए हैं, उन्हें ठीक कराने के लिए सरकार से मांग की जाएगी। - जरीना बेगम, उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की बेटी