पटना में उस्ताद पर नाटक की प्रस्तुति
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 24 अगस्त को पटना में संगीतमय श्रद्धांजलि दी जाएगी। उनके जीवन पर आधारित नाटक की प्रस्तुति होगी। इस नाटक में सोमा घोष की भी भूमिका रहेगी। उस्ताद के जन्म से लेकर शहनाई को बुलंदियों तक पहुंचाने की कहानी को कलाकार नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए पेश करेंगे।
उस्ताद को कजरी की बंदिश थी पसंद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को कजरी गीत काफी पसंद थे। सोमा घोष ने बताया कि वह चाहे गर्मी हो या सावन मास, शहनाई पर कजरी की धुन जरूर बजाते थे। उन्हें मिर्जापुर की कजरी ज्यादा पसंद थी। उनकी देशभक्ति उनकी शहनाई में भी दिखाई देती थी। वह अक्सर देशभक्ति की धुन भी बजाते रहते थे।
उनके गुस्से के आगे बेटे और आयोजक भी डर जाते
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां को सादगी पसंद थी। वह हमेशा तड़क-भड़क से दूर रहते थे। सोमा घोष ने बताया कि एक बार उस्ताद मुंबई से औरंगाबाद जा रहे थे। मार्ग में ही उन्होंने महिला आयोजक को समझाया कि उनके साथ कैसे बात करनी है। लेकिन उन्होंने मुझे ही फटकार दिया। कार्यक्रम से पहले आयोजक से कुछ ऐसा हुआ कि वह गुस्से में कार्यक्रम करने से ही इन्कार कर दिए। उनके बेटे नैय्यर हुसैन भी किनारा कर लिए। आयोजक के हाथ-पांव फूलने लगे। किसी तरह मैंने समझाकर कार्यक्रम संपन्न कराया।