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बिस्मिल्लाह खां: उस्ताद...दिलों में संगीत उतर जाए तो न नफरत होगी और न जंग का इंकलाब, मकबरे पर पेश होगी अकीदत

Sat, 21 Mar 2026 06:12 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Ustad Bismillah Khan Birth Anniversary: शहनाई के बादशाह भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की याद में आज विभिन्न स्थानों पर आयोजन होंगे। उनके मकबरे पर भी खास तरीके से अकीदत पेश की जाएगी।
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उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के पुण्यतिथि पर नमन। - फोटो : अमर उजाला
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Varanasi News: बनारस काबा-ए-हिंदोस्तां है, यह लहराता हुआ एक कारवां है... नजीर बनारसी की यह लाइन बताती है कि बनारस में ही गंगा-जमुनी तहजीब बसती है। इसी के अलमबरदार थे शहनाई के बादशाह भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां। वह यूं तो दुनिया में अपनी शहनाई की जादुई सुरों से पहचाने गए। मगर, उनके लबों से हमेशा दुनिया में अमन-ओ-अमान सुर निकलते थे। 

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कहते थे-संगीत ऐसी चीज है कि जिनके दिलों में उतर जाए, उनमें न नफरत होगी और न जंग का इंकलाब। वे हमेशा जंग के मुखालफत करते थे। संगीत को नफरत भरे जंग को रोकने के लिए हथियार मानते थे।

आज दुनिया में जंग, नफरत और खौफ का माहौल है। ऐसे में उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की संगीत की आवाज इन नफरती जंग पर भारी पड़ती नजर आ रही है। भारत और काशी से बहुत प्यार किया। मगर, दुनिया में अमन को शिखर पर रखा। 
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बनारस घराने के प्रख्यात ख्याल गायिकी के पुरोधा पद्मभूषण पं. साजन मिश्र ने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के साथ गुजारे वक्त को याद करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की विश्व बंधुत्सव की भावना के अनुरूप उस्ताद थे। वह संगीत को शांति प्रदान करने वाला हथियार मानते थे। कहते थे इसे प्रेम की वाणी बताते थे। इसकी ध्वनि से मित्रता, भाईचारा का पैगाम मिलता है।

प्रख्यात सितार वादक पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र कहा कि उस्ताद संगीत को मोहब्बत की भाषा बताते थे। संगीत का धर्म दुनिया में शांति का है। जो इसे सुनता, पसंद करता है उसमें न तो युद्ध की भावना आएगी और न आक्रमता। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के संयोजक शकील अहमद जादूगर ने कहा कि उस्ताद जंग के खिलाफ रहते थे। 

कहते थे कि सुर से मोहब्बत करोगे तो खुदा भी तुमको पसंद करेगा। क्योंकि, खुदा को भी सुर पसंद है। उनको मंदिर, मस्जिद और गंगा भी पसंद थी। क्योंकि वह गंगा में वजू करते, मस्जिद में नमाज अदा करते थे और बाला जी मंदिर में रियाज करते थे। उस्ताद के पौत्र शहनाई वादक आफाक हैदर ने कहा कि दादा हमेशा दुनिया में संगीत को अव्वल मानते थे। कहते थे-इसमें हर खुशी है, जो इंसान को चाहिए। इससे प्यार करने वाले इंसान या इसको माने वाले मुल्क कभी जंग नहीं कर सकते हैं।

सादगी के मिसाल थे उस्ताद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सादगी के मिसाल थे। शकील अहमद जादूगर ने बताया कि वह बिना पंखे के रहते थे। कहते थे कि पंखे से रियाज प्रभावित होता है। गर्मी, धूप में भी छत पर एक कमरे में पूरी जिंदगी गुजार दी।
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अकीदत पेश करेंगे मुरीद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की जयंती पर शनिवार को दरगाहे फातमान स्थित उनके मकबरे पर अकीदत पेश करने के लिए लोग पहुंचेंगे। लोग गुलपोशी कर नमन करेंगे। दोपहर एक बजे से आयोजन होगा। उनके परिवार के लोग शहनाई पेश करेंगे।
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