प्रख्यात सितार वादक पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र कहा कि उस्ताद संगीत को मोहब्बत की भाषा बताते थे। संगीत का धर्म दुनिया में शांति का है। जो इसे सुनता, पसंद करता है उसमें न तो युद्ध की भावना आएगी और न आक्रमता। उस्ताद बिस्मिल्लाह खां फाउंडेशन के संयोजक शकील अहमद जादूगर ने कहा कि उस्ताद जंग के खिलाफ रहते थे।
कहते थे कि सुर से मोहब्बत करोगे तो खुदा भी तुमको पसंद करेगा। क्योंकि, खुदा को भी सुर पसंद है। उनको मंदिर, मस्जिद और गंगा भी पसंद थी। क्योंकि वह गंगा में वजू करते, मस्जिद में नमाज अदा करते थे और बाला जी मंदिर में रियाज करते थे। उस्ताद के पौत्र शहनाई वादक आफाक हैदर ने कहा कि दादा हमेशा दुनिया में संगीत को अव्वल मानते थे। कहते थे-इसमें हर खुशी है, जो इंसान को चाहिए। इससे प्यार करने वाले इंसान या इसको माने वाले मुल्क कभी जंग नहीं कर सकते हैं।
सादगी के मिसाल थे उस्ताद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां सादगी के मिसाल थे। शकील अहमद जादूगर ने बताया कि वह बिना पंखे के रहते थे। कहते थे कि पंखे से रियाज प्रभावित होता है। गर्मी, धूप में भी छत पर एक कमरे में पूरी जिंदगी गुजार दी।
अकीदत पेश करेंगे मुरीद
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां की जयंती पर शनिवार को दरगाहे फातमान स्थित उनके मकबरे पर अकीदत पेश करने के लिए लोग पहुंचेंगे। लोग गुलपोशी कर नमन करेंगे। दोपहर एक बजे से आयोजन होगा। उनके परिवार के लोग शहनाई पेश करेंगे।