इस दौरान जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित भी किया। जिलाधिकारी के इस कृत्य से मैं अपने आपको बहुत अपमानित महसूस कर रहा हूं, जिसके कारण अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होंने पत्र की प्रति प्रमुख सचिव, परिवहन निगम मुख्यालय, लखनऊ, प्रधान प्रबंधक संचालन, लखनऊ, क्षेत्रीक प्रबंधक आजमगढ़ और अनुसूचित जाति आयोग को भी भेजी है।
मामले में जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत का कहना है कि कई बार फोन करने के बाद भी जब फोन नहीं उठा तो मैं ऑफिस में गया जरूर था, क्योंकि जिले में एडीजी और डीआईजी आए थे। जेल में पानी भरने का गंभीर मुद्दा था और बंदियों को हर हाल में यहां से दूसरे जिलों में शिफ्ट करना था।
डीएम ने बताया कि मैंने इनसे कोई दुर्व्यवहार नहीं किया। ये बिल्कुल बेबुनियाद और झूठा आरोप लगा रहे हैं। ये खुद आकर गाड़ी में बैठे थे और काफी देर तक जेल के पास रहकर इन्होंने अच्छा काम भी निपटाया। अब ये ऐसा आरोप क्यों लगा रहे हैं ये मेरी समझ से परे है। मैंने प्रबंध निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम को एआरएम पर कठोर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा है।
यूपीएसआरटीसी के एमडी राजशेखर ने कहा कि उन्हें प्रसाद का त्याग पत्र मिला है और उन्होंने इस मामले पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही कहा कि मामले की रिपोर्ट मिलने के बाद, इस बारे में यूपी सरकार को भी अवगत कराया जाएगा।
बलिया के डीएम का पीछा नहीं छोड़ रहा विवाद :
जिलाधिकारी भवानी सिंह खंगारौत जबसे बलिया आए हैं तब से कई विवादों में घिरते रहे हैं। कई बार ऐसा लगा कि इस बार ये विवाद इनका पीछा नहीं छोड़ेगा, लेकिन हर बार इन्होंने से खुद को बचाते हुए मामले को सुलझा लिया है। अब एक बार फिर ये विवाद में आए हैं, देखना ये है कि इस बार ये खुद को इस विवाद से कैसे बचाते हैं।
भाजपा नेता से कार्यालय में ही हुआ था विवाद
करीब आठ माह पहले रसड़ा क्षेत्र के भाजपा नेता विनोद तिवारी से जिलाधिकारी कक्ष में ही विवाद हो गया और हाथापाई की भी नौबत आ गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने तिवारी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद तहसीलदार की तहरीर पर तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जेल भेज दिया। तिवारी ने आरोप लगाया कि डीएम ने उन्हें थप्पड़ जड़ा। इसके बाद मामला ठंडा पड़ गया।
अधिवक्ता तो अब भी चल रहे नाराज
इसी तरह के एक मामले को लेकर डीएम और अधिवक्ताओं में विवाद हो गया। वह मामला तो अब तक ठंडा नहीं पड़ा है। ये विवाद बांसडीह एसडीएम के तबादले को लेकर हुआ था। अधिवक्ता एसडीएम को हटाने की मांग पर अड़े थे, जबकि डीएम का कहना था कि वे उन्हें तभी हटाएंगे, जब वहां की जनता को कोई दिक्कत होगी। यह तो महज उदाहरण भर है, और भी कई मामलों में जिलाधिकारी का विवादों से नाता रहा है।