आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 14 मई से लेकर 16 मई तक लू चलने और भीषण गर्मी शुरू हो सकती है। इस दौरान दिन का तापमान भी 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर सकता है। वहीं रात का पारा 28 डिग्री को छू सकता है। 16 मई के बाद भी लू की संभावना बन सकती है। डॉ. सिंह ने कहा कि इन इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ का असर कम हो गया है।
23 जून बनारस में मानसून के आने की घोषित तिथि
केरल में मानसून के आने का संकेत मिल चुका है। 1 जून को केरल के पश्चिमी घाट पहाड़ी पर दस्तक देगा। ऐसे में सामान्य तौर पर वाराणसी में मानसून के आने की सामान्य तिथि 23 जून है। लेकिन इस बार अभी तक कोई संकेत नहीं मिला है।
दरअसल इसे पहले से निर्धारित कर पाना इसलिए मुश्किल है क्योंकि समुद्री इलाके में तो मानसून की समय में बदलाव नहीं आता, लेकिन केरल के बाद आगे बढ़ते ही स्थल आ जाता है। इससे मानसून में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। इसकी गति अनियमित हो जाती है। पिछले साल मानसून अपने तय समय से 10 दिन देरी से बनारस आया। काफी दिनों तक मानसून बंगाल और बिहार के बीच ही अटका रहा।
दिन में तेज धूप और गर्मी से राहत के लिए छाते का सहारा लेतीं छात्राएं।
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ट्रिपिंग की समस्या ने बढ़ाई परेशानी पांच घंटे तक कटी रही बिजली
गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली कटौती की समस्या भी बढ़ती जा रही है। शहर से लेकर गांव तक लोकल फॉल्ट, ट्रिपिंग होने के साथ ही अब शटडाउन लेने में लापरवाही से नई मुसीबत खड़ी हो गई है। शनिवार को चितईपुर, केराकतपुर, चांदपुर सहित शहरी इलाके में ट्रिपिंग ने लोगों को परेशान कर दिया।
चांदपुर में बिना सूचना के ही सुबह छह बजे से 11 बजे बिजली कटौती की गई। लाइट आने के बाद भी सारा दिन ट्रिपिंग की समस्या बनी रही। वसंता कॉलेज स्थित 33/11 केवीए उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में दिनभर बिजली की आंख मिचौली चलती रही।
राजघाट, प्रह्लाद घाट, मुकीमगंज, चौहट्टा, लाल खां, पठानीटोला और भदऊचुंगी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में कई बार बिजली घंटों तक गायब रही। सारनाथ में ग्रामीण क्षेत्र में मनमानी बिजली ट्रिपिंग से किसान सहित आमजन परेशान हैं। सथवां फीडर से लगातार बिजली ट्रिपिंग से किसानों के खेत तक सिंचाई का पानी तक नहीं पहुंच पा रहा है।
ओपीडी में बढ़ सकते हैं मरीज
गर्मी से गंभीर बीमारियों के बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। पिछले कुछ दिनों तक मौसम सामान्य था तो हर अस्पताल में रोज 50-100 मरीज ही दस्त, वायरल बुखार और डायरिया से पीड़ित आ रहे थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़ सकती है।
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में मेडिसिन विभाग की सीनियर फिजिशियन प्रो. जया चक्रवर्ती ने कहा कि अब हीट स्ट्रोक, हेपेटाइटिस, गंभीर डिहाइड्रेशन, हीट रैश, डायरिया और हीट एग्जॉर्शन से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ जाएगी।
हीट एग्जॉर्शन में सिर्फ थकान होगी, लेकिन हीट स्ट्रोक में मरीज बेहोश हो जाएंगे। वहीं इससे ऊपर की स्थिति में डायरिया और एक्यूट डिहाइड्रेशन आता है। यदि सामान्य तौर पर एक डॉक्टर ओपीडी में 500 मरीज आ रहे हैं तो तब 700 से ज्यादा आ सकते हैं।
गर्मी में सर्जरी न कराना भ्रम की बातें : सर्जन
गर्मी का मौसम आते ही हर कोई सर्जरी कराने से दूरी बना लेता है। लोगों को लगता है कि ऐसे मौसम में सर्जरी के बाद घाव नहीं सूखते। इस पर बीएचयू में सर सुंदरलाल अस्पताल में सर्जरी विभाग के प्रो. एमए अंसारी ने कहा कि गर्मी और सर्जरी का कोई संबंध नहीं है।
दूरबीन विधि से हो या ओपन, सर्जरी में कोई दिक्कत नहीं होती। हालांकि जिन लोगों को लगता है कि पसीना से घाव पूजने में देरी होगी तो यह केवल भ्रम है। क्योंकि पसीना स्किन के ऊपर ही निकलता है।