मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते हफ्ते सर्किट हाउस में कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा था कि जनता में पुलिस का इकबाल बुलंद हो। आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों में कानून का भय हो लेकिन अपनी साख और हनक कायम रखने की चुनौतियों से घिरी ‘खाकी’ न अपराधियों में भय पैदा कर पा रही है न ही जनता में भरोसा।
डीजीपी सुलखान सिंह ने भी कहा था कि पुलिस अपना काम सही से कर रही है। मगर, हकीकत में पुलिस का इकबाल पूर्वांचल के दस जिलों में बुलंद नहीं दिख रहा है। बीते एक हफ्ते में वाराणसी, गाजीपुर और मिर्जापुर जिले में पुलिस पर दिनदहाड़े तीन बार हमला किया गया।
ये हमले तब हुए जब पुलिस टीमें किसी गिरफ्तारी के लिए नहीं बल्कि उच्चाधिकारियों के निर्देश का अनुपालन कराने पहुंची थीं। जोन भर के जिलों के ऐसे आंकड़े और भी चिंतित कर देने वाले हैं।
बीते सवा तीन महीने में दस जिलों में पुलिस पर 12 बार से अधिक हमले हुए। बीते दो जुलाई को यहां आए मुख्यमंत्री ने कहा था कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो।
मगर, जोन के जिलों में हाल में हुई घटनाओं ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों की मानें तो नई सरकार में भी आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर पुलिस शिकंजा नहीं कस पाई।
दूसरे, थानों और पुलिस की कार्यप्रणाली में भी कोई खास बदलाव नहीं आया। जनता में भरोसा पैदा करने में नाकामी भी पुलिस टीमों पर हाल में हुए हमलों की बड़ी वजह बनी।
वाराणसी एडीजी जोन, बी महापात्रा ने कहा कि भीड़ में शामिल कुछ भटके लोग कभी-कभी माहौल को हिंसक बना देते हैं। इस वजह से सिविल पुलिस को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। मगर, कानून हाथ में लेने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाती है।