भविष्य में बढने वाली ऊर्जा की खपत को देखते हुए सूबे के ऊर्जा महकमे ने अभी से इसको लेकर तैयारी शुरू कर दी है। प्लान इस तरह से बनाया गया है कि 2021 तक बाइस हजार मेगावाट की उपलब्धता सुनिश्चित हो जाए। फिलहाल सूबे में 14 से 16 हजार मेगावाट बिजली की उपलब्धता बनी हुई है।
पीक आवर में इससे अधिक बिजली की मांग होने पर, खुले बाजार से बिजली खरीदनी पड़ रही है। इस साल तपिश में अधिकतम बिजली की मांग 17 हजार मेगावाट पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन गत 14 अप्रैल से आपूर्ति के घंटों में हुई बढ़ोत्तरी ने इस मांग को 19562 मेगावाट तक पहुंचा दिया।
जून अंत तक इसे बीस हजार मेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। आने वाले चार से पांच वर्षों में यह मांग बाइस हजार मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। क्योंकि इस दौरान नए कनेक्सनों में बढ़ोत्तरी का लक्ष्य तय किया गया है। इसको देखते हुए उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य विद्युत उत्पादन निगम के तकनीकी निदेशक वीएस तिवारी भी इसकी पुष्टि करते हैं। बताते हैं कि ओबरा सी 1320 मेगावाट, हरदुआगंज विस्तार 660 मेगावाट, जवाहरगंज 1320 मेगावाट, घाटमपुर 1980 मेगावाट, मेजा 1980 मेगावाट की परियोजना के निर्माण का कार्य शुरू हुई।
इसमें जवाहरगंज और घाटमपुर की 75 प्रतिशत और शेष परियोजनाओं की पूरी बिजली प्रदेश की जनता के लिए उपलब्ध होगी। इन परियोजनाओं से एक-एक कर 2019 से उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इसको देखते हुए ऊर्जा जगत का अनुमान है कि 2021 तक प्रदेश में बाइस हजार मेगावाट बिजली उपलब्ध हो जाएगी।
कम हो रही खपत तो घटाना पड़ रहा उत्पादन
अनपरा। पिछले कुछ सालों में एलईडी के बढ़े चलन और मीटर लगने का सीधा असर बिजली खपत पर पड़ा है। पीक आवर में भले ही बिजली की मांग 16 से 19 हजार तक पहुंच जा रही है लेकिन तपिश में भी ज्यादातर समय यह मांग से तेरह हजार मेगावाट के बीच ही रह रही है।
इस कारण जब अचानक से मांग घट रही है तो राज्य सेक्टर की बिजली परियोजनाओं का उत्पादन घटाना पड़ रहा है। तकनीकी निदेशक वीएस तिवारी बताते हैं कि चूंकि दूसरी परियोजनाओं से करार है, इसलिए उनकी बिजली लेनी पड़ती है और अपनी बिजली का उत्पादन सस्ता होते हुए भी घटाना पड़ता है। -कौशलेंद्र पांडेय