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यादें: पूर्व सीएम कल्याण सिंह ने खत्म कराया था ‘जल नहीं तो कर नहीं’ का आंदोलन

Mon, 23 Aug 2021 05:24 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

 वाराणसी शहर दक्षिणी के पूर्व विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा ने कल्याण सिंह से जुड़ा संस्मरण साझा किया। 
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यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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यूपी के पूर्व सीएम कल्याण सिंह पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। वाराणसी शहर दक्षिणी के पूर्व विधायक श्याम देव राय चौधरी दादा ने कल्याण सिंह से जुड़ा संस्मरण साझा किया। कहा कि   शहर में चल रहे ‘जल नहीं तो कर नहीं’ आंदोलन खत्म कराने का काम कल्याण सिंह ने किया था। उन्होंने उस समय भुक्तभोगियों के 25 प्रतिशत जलकर माफ कराया था।

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मुझे वर्ष तो याद नहीं है, लेकिन उस समय कल्याण सिंह मुख्यमंत्री और लाल कृष्ण आडवाणी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। उस समय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक सारनाथ में हुई। यहां भाजपा के सभी बड़े नेता, केंद्रीय मंत्री आए थे। मैं पंडाल के बाहर बैठा था। उसी वक्त आडवाणी जी ने मुझसे पूछा तुम उदास क्यों हो, तो मैंने कहा कि आज भाजपा का शासन है।

इसके बावजूद हमारे आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया नहीं आ रही है। इस पर उन्होंने कल्याण सिंह को बुलाकर कहा कि भाई इसको देखो कार्यकर्ता का सवाल है। इसके बाद कल्याण सिंह ने लखनऊ बुलाकर मुझसे पूरी बात की। उस समय नगर विकास के सचिव पीएल पुनिया थे।
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उन्हें बुलाकर कल्याण सिंह ने निर्देश दिया कि इस मामले में कुछ करना है। इसके बाद 25 प्रतिशत जलकर माफ किया गया। इसके अलावा छह किस्तों में जलकर जमा करने का आदेश हुआ। उस समय बनारस में जल का अभाव था। लोगों को पानी नहीं मिल रहा था और जलकल वाले जलकर का बिल भेज देते थे। इसके खिलाफ शहर भर में आंदोलन चलाया था। 

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मेरी पीठ थपथपना नहीं भूलते थे कल्याण सिंह

कल्याण सिंह जब भी बनारस आते तो मेरी पीठ दो बार थपथपाते थे। एक बार जैतपुरा के भाजपा कार्यकर्ता बालजी पाठक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसके विरोध में जैतपुरा बंद कराया गया। उस समय कल्याण सिंह बनारस आए थे, लेकिन मुख्यमंत्री नहीं थे। हम लोगों ने जुलूस निकाला। वे मेरे साथ चल रहे थे। इसी बीच पुलिस ने जुलूस में लाठीचार्ज कर दिया। हम लोग किनारे खड़े हो गए।

उस दौरान बनारस के हालत पर काफी देर तक चर्चा हुई थी। इस आंदोलन के लिए उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई। पहले इतनी बड़ी सभाएं नहीं होती थी। उस समय कार्यकर्ता जहां बुलाते थे वहां कल्याण सिंह भाषण देने आते थे। चौक, मैदागिन की सभा में आए थे। वहां कोई पंडाल नहीं था, जनता की भीड़ उनका नाम सुनकर जुट जाती थी। 
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