अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के तौर पर पूरी दुनिया में ख्यात तथागत भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ को आने वाले दिनों में डाल्फिन सेंक्च्युरी के लिए भी जाना जाएगा। नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) के तहत यहां डाल्फिन सेंक्च्युरी विकसित करने की योजना बनाई गई है।
पर्यटन के लिहाज से इसे विश्वस्तरीय बनाया जाएगा। साथ ही, यहां के मौजूदा कछुआ ब्रीडिंग एंड रेस्क्यू सेंटर के विस्तार की भी तैयारी है। पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने वाली डाल्फिन सेंक्च्युरी पर तकरीबन एक करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह देश की दूसरी और यूपी की पहली डाल्फिन सेंक्च्युरी होगी।
रविवार को एनएमसीजी के डायरेक्टर जनरल (डीजी) यूपी सिंह ने सारनाथ कछुआ ब्रीडिंग रेस्क्यू सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने इसके विस्तार के साथ ही डाल्फिन सेंक्च्युरी के लिए जमीन की तलाश और प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
डीजी यूपी सिंह के साथ फारेस्ट वाइल्ड लाइफ के चीफ कंजरवेटर एसके अवस्थी, एनएमसीजी के सलाहकार संदीप बहेरा, वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के चार वैज्ञानिक तीन दिनी दौरे पर यहां आए हैं।
टीम के साथ डीजी ने राजघाट से रामनगर तक जगंगा को साफ-सुथरा करने के लिए चलाई जा रही परियोजनाआें की प्रगति जानी। कछुआ समेत अन्य जलीय जीवों के संरक्षण का हाल जाना। डीजी ने बताया कि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ देहरादून, सेंटर फार इनवायरमेंट एजूकेशन, सिफरी बैरकपुर के साथ मिलकर गंगा की सफाई का काम कराया जा रहा है।
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून का नरौरा में नया रिहैबिलिटेशन रेस्क्यू सेंटर तैयार हो गया है। सारनाथ में कछुआ और डाल्फिन के साथ ही अन्य जलीय जंतुओं को संरक्षित कर गंगा में छोड़ा जाएगा जो गंगा को साफ करने में सहायक होंगे।