दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में संगठन की कार्यपद्धति, विधानसभा स्तर पर जिम्मेदारियों के निर्वहन और चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा होगी। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि चुनाव से पहले संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय बेहतर हो और केंद्रीय नेतृत्व की रणनीति विधानसभा स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
विधानसभा स्तर पर जवाबदेही तय करने की कवायद : पार्टी की कोशिश है कि विधानसभा स्तर पर संगठन की वास्तविक स्थिति का आकलन हो और जहां सुधार की जरूरत है, वहां समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें। प्रशिक्षण वर्ग के माध्यम से बूथ समितियों से लेकर विधानसभा स्तर तक संगठनात्मक समन्वय बेहतर करने, मतदाता संपर्क को नियमित बनाने और चुनावी तैयारियों को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर रहने की संभावना है।
दो दिन में छह सत्रों की तैयारी : जानकारी के अनुसार, दो दिवसीय प्रशिक्षण वर्ग में छह सत्र प्रस्तावित हैं। वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं के मार्गदर्शन में इन सत्रों के जरिये विधानसभा स्तर के पदाधिकारियों को संगठन की प्राथमिकताओं और आगामी चुनाव की तैयारियों के अनुरूप काम करने के लिए तैयार किया जाएगा।
कार्यशाला का समापन 15 अक्तूबर को होगा। भाजपा के लिए यह प्रशिक्षण वर्ग ऐसे समय में हो रहा है, जब पार्टी उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठन की जमीनी सक्रियता बढ़ाने और विभिन्न स्तरों पर चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित करने में जुटी है। पेज-5
काशी क्षेत्र की 71 और गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों पर ध्यान
प्रशिक्षण वर्ग में काशी क्षेत्र की 71 विधानसभा सीटों के 142 प्रभारी-विस्तारक शामिल होंगे। वहीं, गोरखपुर क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों के 124 प्रभारी-विस्तारकों को बुलाया गया है। पदाधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी और प्रशिक्षण को आगामी चुनाव के मद्देनजर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधानसभा प्रभारी और विस्तारक संगठन की रणनीति को स्थानीय स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके प्रशिक्षण के जरिये संगठन की प्राथमिकताओं, क्षेत्रवार चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को लेकर एकरूपता लाने पर जोर रहेगा।
अक्तूबर में दूसरी बार आएंगे तावड़े मतदाता सूची पर रह सकता है जोर
भाजपा की हालिया संगठनात्मक गतिविधियों को देखें तो बूथ प्रबंधन और एसआईआर महत्वपूर्ण विषय बनकर उभरे हैं। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े की दो अक्तूबर को हुई संगठनात्मक समीक्षा के दौरान बूथ स्तर की समितियों की सक्रियता, पन्ना प्रमुखों की भूमिका, मतदाता संपर्क और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया था। बूथों की स्थिति का आकलन, कमजोर कड़ियों की पहचान, मतदाताओं तक पहुंच बनाने और कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों को प्रभावी बनाने जैसे विषयों पर बात की जाएगी।