यहां उन्होंने समाजवादी पार्टी के लाल बहादुर यादव को हराया था। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने से वर्ष 2009 में जौनपुर सदर सीट से लोकसभा चुनाव लड़े और भारी मतों से जीत दर्ज की थी। वर्ष 2009 के उपचुनाव में पिता राजदेव सिंह रारी विधानसभा सीट से बसपा से निर्वाचित हुए।
सीट बंटवारे को लेकर मनमुटाव के चलते बसपा ने धनंजय को पार्टी से निकाल दिया, बाद में जेल भी भेज दिया। जेल में रहते हुए वर्ष 2012 में इन्होंने अपनी पत्नी डॉ. जागृति सिंह को मल्हनी विधानसभा से निर्दलीय चुनाव लड़वाया, लेकिन उनकी पत्नी चुनाव हार गईं। 2017 में भाजपा लहर में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में धनंजय सिंह भी चुनाव जीत नहीं सके।
सपा का गढ़ रही है मल्हनी सीट
वर्ष 2012 से अस्तित्व में आने के बाद मल्हनी विधान सभा क्षेत्र सपा का गढ़ रहा है। पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव अब अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यहां अब तक हुए चुनावों में सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड सपा के पारसनाथ यादव के नाम पर है। वहीं सबसे कम अंतर से चुनाव जीतने वाले राजबहादुर हैं।
सिकरारा, बक्शा और करंजाकला ब्लाक के अधिसंख्य और सिरकोनी ब्लॉक के कुछ हिस्सों को मिलाकर मल्हनी (पहले रारी) विधानसभा क्षेत्र का गठन हुआ है। वर्ष 2012 में मल्हनी सीट पर हुए पहले चुनाव में सपा के पारसनाथ यादव ने रिकार्ड 81602 वोट पाकर निर्दल उम्मीदवार डॉ. जागृति सिंह को 31502 वोटों के अंतर से हराया था। डॉ. जागृति को 50100 वोट मिले थे।