यूपी बोर्ड ने आधी-अधूरी तैयारी के साथ ही बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। अभी तक न तो केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हो सकी है और न तो परीक्षकों की सूची ही तैयार हुई है। आलम यह है कि अभी तक विद्यालयों में आधा कोर्स भी पूरा नहीं हो सका है। कई स्कूलों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं भी नहीं शुरू हो सकी हैं। यूपी बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों का सत्र अप्रैल से शुरू कराने के चक्कर में सूबे के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ की तैयारी कर ली गई है।
विभागीय कार्यालय और शिक्षकों द्वारा बताया जा रहा है कि नवंबर में ही प्रायोगिक परीक्षाएं भी होनी हैं। बोर्ड स्तर से अभी तक विद्यालयों को परीक्षकों की सूची तक जारी नहीं की गई है। शिक्षकों के आधार कार्ड तक विद्यालयों द्वारा उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।
इस बार सत्र शुरू हुआ जुलाई में अगस्त तक दाखिले की कार्रवाई चली। सितंबर से कक्षाएं सुचारु रूप से शुरू हुईं और 15 नवंबर से प्रैक्टिकल की तिथियां घोषित हो गईं। ऐसे में यह आसानी से समझा जा सकता है कि छात्र-छात्राओं का कोेर्स कितना पूरा हुआ होगा।
पाठ्यक्रम के संबंध में प्रधानाचार्यों व शिक्षकों ने भी गोलमोल जवाब दिया। अधिकांश प्रधानाचार्यों का कहना है कि उनके यहां लगभग 75 प्रतिशत कोर्स पूरा हो गया है तो कुछ ने इसे 60 फ ीसदी बताया। हालांकि यह कयास आसानी से लगाया जा सकता है कि जब स्कूलों में अभी तक अर्द्ध वार्षिक परीक्षा तक नहीं हुई हैं तो कोर्स कितना पूरा हुआ होगा। अभी तक संबंधित परीक्षार्थियों की नामावली तक दुरुस्त नहीं हो सकी है।
गलतियों की भरमार
इस बार परीक्षा केंद्रों का निर्धारण बोर्ड मुख्यालय से होना है। इसके लिए बोर्ड मुख्यालय से सभी जिलों से ऑन लाइन सूचनाएं मांगी गई थीं। लेकिन आलम यह है कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के केंद्र निर्धारण के लिए अंतिम तिथि तक वाराणसी, आजमगढ़ और मिर्जापुर मंडल के 1260 विद्यालयों का डेटा अपलोड नहीं किया जा सका था। जिन विद्यालयों का विवरण ऑनलाइन किया गया है उसमें गलतियों की भरमार है।