गंगा और कुंडों का कचरा साफ करने के लिए तकनीक की मदद ली जाएगी। इसके लिए मानव रहित नाव (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्लियर बोट) का इस्तेमाल किया जाएगा। जो रिमोट से संचालित होगी। तकनीक के जरिये डाटा फीड करने से नाव में लगे कैमरे आधा किमी दूर गंगा में तैरते निर्माल्य, प्लास्टिक, गंदगी को देखकर संकेत देंगे।
इसके बाद नाव में लगे उपकरण वहां जाकर गंदगी को खींच लेंगे। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि केरल के बाद बनारस दूसरा शहर होगा, जहां इसका सफल ट्रायल हो चुका है। हांगकांग की तकनीक पर इस नाव को देश के दो इंजीनियरों ने स्टार्टअप के तहत तैयार किया है। इंटरनेट प्रोटोकॉल तकनीक से लैस बैटरी संचालित नाव को सैकड़ों किमी दूर से नियंत्रित किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल गंगा के अलावा कुंडों और जलाशयों की गंदगी साफ करने में होगा। इस पर अंतिम निर्णय आला अधिकारियों के साथ होने वाली बैठक में लिया जाएगा।