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विद्यापीठ छात्रसंघ में सछास का परचम

Tue, 27 Sep 2016 01:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव में समाजवादी छात्र सभा (सछास) ने परचम लहराया। अध्यक्ष पद पर सछास पैनल के अनूप सोनकर अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के प्रशांत कुमार राय को 1183 वोट से करारी शिकस्त दी। महामंत्री पद हालांकि एबीवीपी के खाते में आया लेकिन उपाध्यक्ष और पुस्तकालय मंत्री पद पर जीत के साथ सछास पैनल ने अपना दबदबा कायम किया।
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सोमवार को मानविकी संकाय परिसर में बने 20 बूथों पर कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह आठ बजे से दो बजे तक करीब 60.08 प्रतिशत वोटिंग हुई।  यह विश्वविद्यालय का अब तक का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है। कुल 7896 मतों में 4744 वोट पड़े। 3232 छात्रों जबकि 1512 छात्राओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। इस दौरान कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने चुनाव अधिकारी प्रो. शंभू उपाध्याय, कुलानुशासक प्रो. योगेंद्र सिंह के साथ बूथों का जायजा लिया। पहली बार ओएमआरशीट से मतदान के चलते मतगणना में कम समय लगा, वहीं किसी तरह की दिक्कत नहीं आई। अध्यक्ष पद पर सछास के अनूप सोनकर ने 2249 वोट मिले जबकि एबीवीपी के प्रशांत कुमार राय को 1066 मत। अनूप जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के भाई हैं।


उपाध्यक्ष पद पर कांटे की टक्कर में छात्रसभा के प्रत्याशी प्रेमप्रकाश गुप्ता ने 34 वोटों से जीत हासिल की। उन्हें 2155 मत मिले जबकि एनएसयूआई के कृष्णवीर सिंह को 2121 वोट प्राप्त हुए। महामंत्री पद पर एबीवीपी के समीर मिश्रा 149 वोट से निर्वाचित हुए। उन्हें 2270  मत मिले। जबकि एनएसयूआई के विकास तिवारी को 2121 मत मिले। पुस्तकालय मंत्री पद पर छात्रसभा के अंगद यादव  1485 मत प्राप्त कर जीते। अविनाश कुमार गुप्ता को 906 वोटों से संतोष करना पड़ा। दोपहर साढ़े तीन बजे से शुरू हुई मतगणना एक घंटे चली। इसके बाद चुनाव नतीजों की घोषणा के साथ ही सछास समर्थक खुशी से झूम उठे।  निर्वाचित पदाधिकारियों को कुलपति डॉ. पृथ्वीश नाग ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।
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 सियासत को लेकर युवाओं के मन-मिजाज में आ रहे बदलाव की एक झलक सोमवार को विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव में नजर आई। यहां पहली बार दिया गया नोटा (इनमें से कोई नहीं) का विकल्प भी छात्र-छात्राओं ने खूब आजमाया। अलग-अलग पदों पर प्रत्याशी नापसंद होने पर 625 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। राजनीति के जानकार इसे एक बड़े बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। उनके मुताबिक नोटा का विकल्प मतदाताओं की एक बड़ी ताकत बनकर उभर सकता है। मतदान में सहभागिता मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है। नोटा के विकल्प से कोई भी जिम्मेदार नागरिक मतदान में सहभागिता के साथ ही प्रत्याशी को उसकी योग्यता या अपनी पसंद के आधार पर खारिज कर सकता है। छात्रसंघ चुनाव में नोटा के प्रति सामने आया युवाओं का रुझान जाहिर करता है कि भविष्य में यदि लोकसभा या विधानसभा चुनाव में नोटा का विकल्प मिला तो वहां चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं। विद्यापीठ छात्रसंघ चुनाव में नोटा का सर्वाधिक इस्तेमाल मानविकी संकाय प्रतिनिधि पद पर हुआ। इस पद के लिए 155 विद्यार्थियों ने नोटा का इस्तेमाल किया और इसी पद पर सर्वाधिक 220 मत अवैध भी रहे। जबकि अध्यक्ष पद पर 34, उपाध्यक्ष पद पर 76, महामंत्री पद पर 130, पुस्तकालय मंत्री पद पर 149 मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया। चुनाव में कुल 625 मत अवैध रहे।
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