वाराणसी। वैदिक विज्ञान के पीछे आज पाश्चात्य देश लगे हैं, वे इसके समृद्ध ज्ञान की खोज कर रहे हैं। इसकी अपार संभावनाओं को अपने उपयोग में ला रहे हैं। यह हमारी धरोहर है हम उससे पीछे क्यों हैं हमें इस पर कार्य करने की आवश्यकता है। उक्त विचार महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने व्यक्त किए। वह रविवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी भवन सभागार में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय और रानी पद्मावती तारा योगतंत्रादर्श संस्कृत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में वैदिक विज्ञान के विभिन्न आयाम विषयक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथि बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति, संस्कार और संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की चिंता वेदों के माध्यम से करके भारत विश्व गुरु बना। संपूर्ण वसुधैव परिवार है इसे सुरक्षित एवं संरक्षित करने के लिए हमें वेदों की तरफ ध्यान देने की आवश्यकता है।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि वेदों में पर्यावरण का पूरा ध्यान रखा गया है। यदि उसके माध्यम से चलते तो इतना विषधारी वातावरण उत्पन्न न होता। इस दौरान प्रो. महेंद्र नाथ पांडेय, डॉ. लक्ष्मीकांत पाठक, डॉ. विशाखा शुक्ला को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. रत्नेश झा, प्रो. हरप्रसाद दीक्षित, प्रो. हरि प्रसाद अधिकारी, प्रो. जानकी प्रसाद द्विवेदी, डॉ. वेदानंद झा मौजूद रहे।