हास्य कवि दमदार बनारसी ने अंधी है मुहब्बत ये आपने सुना है किंतु, मैंने आजमाया है ये दर्द खाली देती है..., ऐसी ही कठोर प्रेमिका से मैं निभा रहा हूं, जरा सा भी भाव नहीं मतवाली देती है...सुनाकर तालियां बटोरी। इस दौरान मीर गोरखपुरी, धर्मप्रकाश मिश्र, बिहारी लाल अंबर, संदीप शरारती, रीना झा व नेहा झा ने हास्य कविताओं की प्रस्तुति दी।