कोविड-19 वैश्विक महामारी से उपजे हालात तथा प्रभावित कालीन उद्योग को पटरी पर लाने के लिए केंद्रीय वस्त्र मंत्री, स्मृति ईरानी ने रविवार को कालीन निर्यातकों से ऑनलाइन मुखातिब हुईं। बैठक में घर बैठे दिल्ली, हरियाणा, जयपुर, उप्र के कालीन निर्यातकों ने हिस्सा लिया और कालीन उद्योग को पटरी पर लाने के लिए अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। उद्यमियों ने फौरी तौर पर हालिया बढ़े माल भाड़े को कम करने की मांग की। अन्य सुविधाओं को भी बहाल करने की लोगों ने मांग की।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना से अभूतपूर्व नुकसान हुआ है। गत पिछले चार माह में विश्वस्तर पर होने वाले कई कारपेट व टेक्सटाइल प्रदर्शनियां रद हो चुकी हैं। आगामी एक दो वर्षों तक इस तरह के प्रदर्शनियों में भाग लेने से आयातक और निर्यातक कतराएंगे। कुल मिलाकर एक दो वर्ष तक कोरोना का प्रभाव बना रहेगा। केंद्रीय वस्त्र मंत्री के सामने वर्चुअल कारपेट फेयर लगाने की मांग की गई। कहा गया कि ऐसे समय इस तरह के फेयर काफी प्रभावी साबित हो सकते हैं।
लोगों ने हाल ही बढ़े हवाई माल भाड़े में हुई वृद्धि को वापस लेने की मांग की। केंद्रीय मंत्री को सुझाव दिया गया कि महानगरों से पूर्वांचल के जिलों में लौट रहे बड़ी संख्या में कामगारों को कालीन उद्योग में रोजगार मिल सकता है। इस पर गंभीर विचार विमर्श की आवश्यकता है। लोगों के कई महीने से रुके जीएसटी रिफंड की मांग की गई। केंद्रीय मंत्री ने उद्योग को कामगारों की रीढ़ बताया। कहा कि सरकार गंभीर है। उपजे हालातों पर चर्चा कर शीघ्र योजनाओं की घोषणा की जाएगी। एक घंटे तक बैठक चली।