पिता के हत्यारों के विरुद्ध पैरवी की तो गांव निवासी रिटायर्ड इंस्पेक्टर प्रेमवीर सिंह राणा और प्रधान प्रताप सिंह राणा ने समझौते के लिए दबाव बनाया। जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस पर थाना दोघट में मुकदमा दर्ज कराया गया। प्रेमवीर सिंह राणा, ग्राम प्रधान प्रताप सिंह राणा, बाबू, नीरज सिंह ने दबाव डाला कि मुकदमा खत्म कर लो। इस पर सभी ने यूपी, उत्तराखंड, दिल्ली समेत अन्य शहरों में फर्जी केस दर्ज कराए। सामूहिक दुष्कर्म तक के मुकदमे फर्जी महिलाओं के जरिये लिखवाए गए, जिसमें वह बरी होता गया।
आरोप है कि थाना लाइन बाजार में पिता के हत्यारोपी बाबू व नीरज, प्रताप सिंह राणा, प्रेमवीर सिंह राणा, रतनवीर उर्फ उर्फ मोनू और अन्य साजिशकर्ताओं ने जौनपुर के ही रामआसरे निवासी नई काॅलोनी हुसैनाबाद थाना लाइन बाजार को रुपयों का लालच देकर 2019 में मेरे खिलाफ तहरीर दिलवाई।
निश्चय राणा ने पुलिस को बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी संजय वर्मा को आर्थिक लाभ देकर 2019 की फर्जी एवं झूठी घटना की तहरीर देकर वर्ष 2023 में धोखाधड़ी, गाली गलौज समेत अन्य आरोपों में केस दर्ज करवा दिया। दरोगा गोपाल जी तिवारी ने गैर इरादतन हत्या की धारा बढ़ाकर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
इस मामले में लाइन बाजार के थाना प्रभारी निरीक्षक सतीश सिंह ने बताया कि आरोपी प्रताप सिंह राणा, प्रेमवीर सिंह राणा, रतनवीर मस्त, बाबू उर्फ मोनू, नीरज, रामआसरे सिंह, तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक संजय वर्मा, उप निरीक्षक गोपाल जी तिवारी और अन्य अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
संगठित गिरोह के जरिये फंसाया पांच साल बाद मिली राहत
आरोप है कि रिटायर्ड निरीक्षक प्रेमवीर सिंह राणा की इंस्पेक्टर संजय वर्मा से नजदीकी थी। एक संगठित गिरोह के तहत वादी निश्चय को फंसाने की पटकथा प्रेमवीर सिंह ने रची। इंस्पेक्टर संजय वर्मा, दरोगा गोपाल जी तिवारी ने आर्थिक लाभ के चक्कर में अपराधियों से मिलीभगत कर निश्चय राणा के खिलाफ केस दर्ज कराया। निश्चय राणा ने बताया कि पांच साल बाद राहत मिली है। इन आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।