मांगने पर नागकुंड से जल में तैरते मिलते बर्तन
वामन पुराण के अनुसार राजा की 52 रानियां थी। उन्हीं के स्नान के लिए राजा ने इस कुंड का निर्माण कराया था। चारों तरफ से नीचे उतरने के लिए 52 सीढ़ियों वाले इस कुंड के बारे में जनचर्चा है कि यात्रियों को पुराने समय में कुंड से याचना करने पर उन्हें उपयोग के बर्तन जल में तैरते मिल जाते थे। जिसे उपयोग कर फिर से इसे कुंड में डाल दिया जाता था।
मगर समय के साथ कुंड की यह महिमा समाप्त हो गई। अब तो कुंड के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। कुंड पर सावन के शुक्ल पक्ष की पंचमी को स्नान करने वाले को अक्षय पुण्य मिलता है। नाग पंचमी में यहां दूर-दूर से दर्शनार्थी नागकुंड के दर्शन व स्नान के लिए आते हैं, पर आज के समय में ऐतिहासिक नागकुंड उपेक्षित है। चारों ओर कूड़े का ढेर लगा है। कभी -कभी समाजिक संस्था के लोग सफाई करते है,पर प्रसाशनिक उपेक्षा के चलते ऐतिहासिक धरोहर इतिहास के पन्ने में सिमट गया है।